नींद न आने की समस्या से परेशान व्यक्ति (सौ. एआई)
Sleep Onset Insomnia Symptoms: आजकल रात को अच्छी नींद लेना भी कई लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार ऐसा होता है कि बिस्तर पर लेटने के बावजूद भी नींद नहीं आती। इसे मेडिकल भाषा में स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया यानी नींद न आने की समस्या कहते हैं। यह केवल एक आम परेशानी नहीं है बल्कि यह आपके पूरे दिन की ऊर्जा, मूड और स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।
नींद की कमी मस्तिष्क और शरीर दोनों को थका देती है जिससे दिनभर तनाव, चिड़चिड़ापन और ध्यान में कमी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
आज के दौर में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। सोने से ठीक पहले इन उपकरणों का इस्तेमाल करना शरीर में नींद के हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन को रोक देता है। आयुर्वेद में इसे मानसिक अशांति और प्रकाश से उत्पन्न विकार कहा जा सकता है। जब स्क्रीन की नीली रोशनी आंखों में पड़ती है तो मस्तिष्क सोचने लगता है कि दिन अभी खत्म नहीं हुआ। परिणामस्वरूप शरीर बिस्तर पर होने के बावजूद रिलैक्स नहीं होता और नींद नहीं आती।
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अक्सर दिनभर बिस्तर पर लेटकर दिनभर की घटनाओं या आने वाले कल की चिंताओं में लोग डूब जाते हैं। जिसकी वजह से नींद नहीं आती है। आयुर्वेद में इसे चित्त विकार कहता है। जब मस्तिष्क लगातार अलर्ट मोड में रहता है तो शरीर को नींद की जरूरत होने के बावजूद भी आराम नहीं मिल पाता। यह सोचने का सिलसिला कई बार अनजाने में आदत बन जाता है जिससे नींद न आने की समस्या होती है।
नींद न आने का सबसे बड़ा कारण कैफीन का सेवन है। खासकर दोपहर के बाद चाय या कॉफी पीना। शरीर में कैफीन का असर शरीर में 6 से 8 घंटे तक रहता है। इसका मतलब यह है कि अगर आप शाम को चाय पीते हैं तो रात को बिस्तर पर जाने पर आपका मस्तिष्क सक्रिय रहता है और नींद नहीं आती। आयुर्वेद में इसे पित्त और वात के असंतुलन से जोड़ा जाता है जो शरीर को गर्म और उत्तेजित रखता है।
स्लीप ऑनसेट इंसोमनिया का एक और कारण अनियमित सोने और जागने का समय है। जब रोज अलग-अलग समय पर सोते और जागते हैं तो हमारा शरीर यह संकेत नहीं देता कि कब सोना है और कब जागना है। आयुर्वेद में इसे शरीर की प्राकृतिक लय के विघटन के रूप में देखा जाता है। इस वजह से नींद आने में देर होती है और नींद की गुणवत्ता भी कम हो जाती है।
नींद की समस्या को दूर करने के लिए कुछ आसान उपाय हैं। सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का इस्तेमाल कम करें और कमरे को अंधेरा रखें। हल्का संगीत सुनना, गहरी सांस लेना या आयुर्वेदिक हर्ब्स जैसे अश्वगंधा और ब्राह्मी का सेवन मानसिक शांति में मदद कर सकता है। दोपहर के बाद कैफीन से बचें और रोजाना एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें। आयुर्वेद के अनुसार यह वात और पित्त को संतुलित करके नींद को प्राकृतिक रूप से सुधारता है।