सिर्फ संक्रमित बीमारी ही नहीं रोजमर्रा की आदतों से हो सकता है टाइफाइड, जानें आयुर्वेदिक उपाय

Ayurvedic Treatment For Typhoid: टाइफाइड यानि मियादी बुखार की समस्या सबसे ज्यादा गंभीर हो गई है। यह बीमारी खासतौर पर गंदा पानी, अस्वच्छ भोजन और खराब जीवनशैली के कारण फैलती है।
Typhoid Symptoms, indore
टाइफाइड का आयुर्वेदिक इलाज (सौ. डिजाइन फोटो)
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Typhoid Symptoms: आजकल हर किसी की जिंदगी भागदौड़ भरी हो गई है इसके लिए सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है। वैसे तो दुनियाभर में कई बीमारियों का खतरा बढ़ते जा रहा है लेकिन टाइफाइड यानि मियादी बुखार की समस्या सबसे ज्यादा गंभीर हो गई है। यह बीमारी खासतौर पर गंदा पानी, अस्वच्छ भोजन और खराब जीवनशैली के कारण फैलती है। अक्सर लोग सोचते हैं कि सिर्फ संक्रमित व्यक्ति से ही बीमारी होती है, लेकिन असल में आपकी रोजमर्रा की कुछ आदतें भी टाइफाइड का कारण बन सकती हैं।

क्या होती है टाइफाइड का बीमारी

यहां पर टाइफाइड बीमारी की बात करें तो, यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होता है। यह बैक्टीरिया आंत, रक्त और यकृत-प्लीहा तक फैलता है और तेज बुखार, पेट दर्द, कमजोरी, भूख न लगना और जीभ पर सफेद परत जैसी समस्याएं पैदा करता है। अगर समय पर इलाज न हो तो यह आंतों में अल्सर, आंतरिक रक्तस्राव और अन्य गंभीर समस्याएं भी पैदा कर सकता है। इस बीमारी को आयुर्वेद में अलग नाम दिया गया है।आयुर्वेद में टाइफाइड को 'मियादी ज्वर' कहा गया है।

किन कारणों से फैलती है बीमारी

यहां पर टाइफाइड की बीमारी फैलने के कारण हाथ धोए बिना खाना खाना, खुले में रखा या बासी खाना खाना, साफ-सफाई का ध्यान न रखना या घर में दूषित पानी पीना जैसी छोटी-छोटी गलतियां भी होती है जो पाचन तंत्र को कमजोर करने का काम करती है। टाइफाइड जैसी बीमारी के शरीर में प्रवेश करने पर इसका प्रभाव बुरा देखने का मिलता है।

क्या आयुर्वेद में छिपा है इसका इलाज

यहां पर आयुर्वेद में टाइफाइड से निपटने का इलाज छिपा हुआ है।आयुर्वेद के अनुसार जब हमारी जठराग्नि यानी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, तब रोगाणु आसानी से शरीर में पनपते हैं। इसलिए टाइफाइड से बचाव और इलाज के लिए आयुर्वेद में ज्वरनाशन, अग्नि दीपना, पाचन सुधार और ओज-वर्धन जैसे सिद्धांतों पर बल दिया गया है। आयुर्वेदिक उपायों में आप औषधियों का सेवन कर सकते है। इसमें गिलोय का रस सेहत के लिए फायदेमंद होता है जो इम्युनिटी बढ़ाने और बुखार कम करने में मदद करता है। इसके अलावा तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा बैक्टीरिया नष्ट करने के लिए बेहद असरदार है। मुलेठी, लौंग का पानी और सुदर्शन चूर्ण भी शरीर की ताकत और पाचन सुधारने में मदद करते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

यहां पर आयुर्वेद में रोजमर्रा की आदतों का भी खास ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। साफ पानी पीना, पका और ताजा खाना खाना, हाथ धोना, पाचन सुधारने वाले हल्के भोजन जैसे मूंग दाल की पतली खिचड़ी, छाछ या पका केला लेना, और नियमित रूप से आयुर्वेदिक हर्ब्स का सेवन करना टाइफाइड से बचाव में बहुत कारगर है।

आईएएनएस के अनुसार

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