आंखों में थकान महसूस करता व्यक्ति (सौ. एआई)
Screen Time Eye Problem: आज के डिजिटल युग में घंटों स्क्रीन के सामने बैठना हमारी मजबूरी बन गया है जिसका सीधा असर हमारी आंखों की रोशनी पर पड़ रहा है। बदलते मौसम में आंखों में चिपचिपापन और पानी आने की समस्या भी आम है। लेकिन घबराएं नहीं कुछ आसान घरेलू और प्राकृतिक तरीकों से आप न केवल आंखों का स्ट्रेस कम कर सकते हैं बल्कि बढ़ते चश्मे के नंबर को भी नियंत्रित कर सकते हैं।
कंप्यूटर और मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों की मांसपेशियों को थका देती है। इससे बचने के लिए आई एक्सरसाइज और सनगैजिंग रामबाण इलाज हैं। रोजाना कम से कम 10 मिनट अपनी आंखों को चारों दिशाओं में (ऊपर, नीचे, दाएं और बाएं) घुमाएं। यह प्रक्रिया 5 बार दोहराएं और फिर आंखें बंद कर आराम दें। इसके साथ ही सूर्योदय या सूर्यास्त के समय 1 घंटे पहले नंगी आंखों से सूरज को निहारें। अंत में हथेलियों को आपस में रगड़कर आंखों पर लगाएं इससे रक्त संचार बढ़ता है और मांसपेशियों को सुकून मिलता है।
गर्मियों के मौसम में आंखों में सूखापन बढ़ जाता है। ऐसे में आंखों की जलन और थकावट दूर करने के लिए खीरे या ककड़ी की स्लाइस का आईपैक सबसे असरदार है। रोजाना 10-15 मिनट के लिए खीरे की स्लाइस आंखों पर रखकर शांत बैठें। यह न केवल आंखों की जलन को शांत करता है बल्कि आंखों के आसपास के काले घेरों को कम करने में भी मदद करता है।
यह भी पढ़ें:- मुल्तानी मिट्टी के ये 3 फेस पैक चेहरे पर लाएंगे जबरदस्त निखार, बस जान लें लगाने का सही तरीका
आंखों की सेहत के लिए सबसे जरूरी है अनुशासन। नियम बना लें कि रात 9 बजे के बाद किसी भी डिजिटल गैजेट का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इससे आंखों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और माइग्रेन या सिर दर्द जैसी समस्याओं में भी राहत मिलती है। रात को समय पर डिजिटल डिटॉक्स करने से नींद की गुणवत्ता भी सुधरती है।
प्राचीन योग पद्धति त्राटक आंखों की सफाई के लिए बेहतरीन है। एक अंधेरे कमरे में मोमबत्ती या दीया जलाकर उसकी लौ को तब तक एकटक देखें जब तक आंखों से पानी न आने लगे। यह क्रिया न केवल आंखों की गंदगी साफ करती है बल्कि आपकी एकाग्रता को भी कई गुना बढ़ा देती है। इन सरल आदतों को कुछ महीनों तक नियमित फॉलो करने से आप खुद अपनी आंखों की रोशनी में सकारात्मक सुधार महसूस करेंगे।