

Cranberry Benefits In Hindi: भारत समेत कई राज्यों में क्रैनबेरी पाया जाता है। गहरे लाल रंग का यह फल बहुत कम समय के लिए बाजार में आता है। क्रैनबेरी को हिंदी में करौंदा कहा जाता है। खट्टे-मीठे टेस्ट वाले इस फल को कच्चा खाने के साथ-साथ इसका इस्तेमाल चटनी, अचार, जैम व जूस बनाने में भी किया जाता है।
क्रैनबेरी इम्युनिटी को बूस्ट करता है। यह यूटी आई में भी कारगर है। इसमें आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, जिंक जैसे तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरीके से लाभ पहुंचाते हैं।
क्रैनबेरी में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है। इसी वजह से करौंदे को अपनी डाइट में शामिल करने से वजन घटाने में मदद मिलती है। क्रैनबेरी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जो ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने और इंसुलिन के स्तर में अचानक वृद्धि को रोकने में मदद करता है। इससे शरीर में फैट जमा होने से बचा जा सकता है।
क्रैनबेरी में एंटी ऑक्सीडेंट के साथ-साथ विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में होती है, जो चेहरे को मॉइश्चराइज करता है और ग्लो बढ़ाता है। यह बढ़ती उम्र के असर को कम करने में भी मददगार होता है। क्रैनबेरी में एंटी सेप्टिक प्रॉपर्टीज होती है, जो चेहरे को कील-मुहांसों से बचाती है।
10 से 12 क्रैनबेरीज़ को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। इसे ब्लेंडर में शहद के साथ पीस लें। अब इसमें दो चम्मच ऑर्गन ऑयल मिलाकर इसे चेहरे और गर्दन पर अच्छी तरह लगाएं। 10 मिनट तक लगाकर रखने के बाद हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में चेहरे की मसाज करें। नाक और फोरहेड पर भी मसाज करें, इससे डेड स्किन निकल जाएगी। फिर नॉर्मल पानी से चेहरा धो लें। आपका चेहरा दमक उठेगा। स्किन से फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करता है। फ्री रेडिकल एक ऐसा मॉलिक्यूल होता है जो स्किन सेल्स को बुरी तरह डैमेज कर देता है। इसकी वजह से प्रीमैच्योर एजिंग भी होती है, जिसमें करौंदा मददगार होता है।
स्टडीज बताते हैं कि रोजाना एक गिलास क्रैनबेरी का जूस पीने से एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है। इसके बढ़ने से एथेरोस्क्लेरोसिस, दिल का दौरा और स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
कुछ लोगों को क्रैनबेरी या इससे बने उत्पाद के सेवन से खुजली, चकत्ते या सूजन का अनुभव हो सकता है।
संवेदनशील व्यक्तियों में करौंदा के अधिक मात्रा में सेवन से मतली, पेट दर्द या दस्त हो सकते हैं।
क्रैनबेरी का अत्यधिक सेवन ऑक्सालेट के स्तर को बढ़ाता है, जिससे गुर्दे की पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है।
क्रैनबेरी रक्त को पतला करने वाली दवाओं के प्रभाव को बढ़ा सकती है, जिससे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।