बच्चे के जन्म के 9 से 12 महीने बाद पिताओं में बढ़ जाता है डिप्रेशन का खतरा, जानें क्या है इसकी मुख्य वजह

Postpartum Depression: अक्सर डिप्रेशन को केवल माताओं से जोड़कर देखा जाता है लेकिन बच्चे के जन्म के बाद पिताओं में भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
Male Postpartum Depression
डिप्रेशन का शिकार पिता (सौ. फ्रीपिक)
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Father's Mental Health: घर में नन्हे मेहमान का आगमन खुशियों और नई उम्मीदें लेकर आता है। आमतौर पर बच्चे के जन्म के बाद मां के मानसिक स्वास्थ्य और पोस्टपार्टम ब्लूज पर काफी चर्चा होती है लेकिन इस बीच उस पिता के संघर्ष को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है जो चुपचाप जीवन में आए इन बड़े बदलावों के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहा होता है। हाल ही में जेएएमए नेटवर्क ओपन में प्रकाशित एक रिसर्च ने पिताओं के इसी छिपे हुए मानसिक दबाव पर से पर्दा उठाया है।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

इस अध्ययन के नतीजे चौंकाने वाले हैं। शोध में बताया गया है कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद नहीं बल्कि लगभग एक साल के भीतर पिता के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस दौरान पिताओं में डिप्रेशन और अत्यधिक तनाव से जुड़ी समस्याओं का जोखिम 30 फीसदी से अधिक बढ़ जाता है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि पितृत्व का अनुभव पुरुषों के लिए भी मानसिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

रिसर्च में हुआ खुलासा

स्वीडन में किए रिसर्च के अनुसार जिसमें करीब 10 लाख पुरुषों के डेटा का गहराई से विश्लेषण किया गया। इतनी बड़ी आबादी पर किए गए इस अध्ययन ने यह साफ कर दिया कि शुरुआती कुछ महीनों में पिता अक्सर स्थिर और मजबूत नजर आते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि उस दौरान उनका पूरा ध्यान मां और नवजात शिशु की देखभाल पर केंद्रित रहता है जिसके चलते वे अपनी थकान, मानसिक तनाव और भावनात्मक जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं।

सबसे संवेदनशील समय

अध्ययन के अनुसार बच्चे के जन्म के 9 से 12 महीने बाद का समय पिताओं के लिए सबसे संवेदनशील होता है। इस समय तक मानसिक दबाव धीरे-धीरे दिमाग के किसी कोने में घर बना लेता है। इसके पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार होते हैं।

  •  बच्चे के बड़े होने के साथ नींद का पैटर्न प्रभावित होना जारी रहता है।
  • काम और परिवार की बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है।
  • बढ़ते खर्चों और भविष्य की चिंता मानसिक बोझ को बढ़ा देती है।
  • साथी के साथ संबंधों के समीकरणों में बदलाव भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

सामाजिक दबाव और चुप्पी

अध्ययन में एक गंभीर चुनौती का भी उल्लेख किया गया है पुरुषों की चुप्पी। सामाजिक ढांचे और भावनाओं को छिपाने की प्रवृत्ति के कारण पिता अक्सर अपनी मानसिक स्थिति के बारे में खुलकर बात नहीं कर पाते। वे मदद लेने में संकोच करते हैं जिससे समस्या गंभीर होने तक पहचान में ही नहीं आ पाती। यही कारण है कि आज पिताओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अधिक जागरूकता और एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम की आवश्यकता है।

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