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शिशु सुरक्षा दिवस 2025: पैरेंटिंग के इन मिथकों से रहें दूर, ऐसे करें बच्चे की सही देखभाल
Infant Care Tips: नवजात शिशुओं की देखभाल के प्रति जागरूक करने वाला दिन 1990 से हर साल मनाया जा रहा है और इसकी शुरुआत यूरोपीय देशों में हुई थी।
- Written By: दीपिका पाल

शिशु संरक्षण दिवस (सौ. सोशल मीडिया)
Parenting Myths: हर माता-पिता के लिए अपने बच्चों की सुरक्षा जरूरी होती है वो छोटा हो या फिर बड़ा उसकी देखभाल करना जरूरी है। नवजात शिशुओं की सुरक्षा और देखभाल के लिए हर साल 7 नवंबर को शिशु सुरक्षा दिवस ( Infant Protection Day 2025) मनाया जा रहा है। यह दिन हर साल मनाया जाता है और नवजात बच्चों की सेहत और देखभाल के प्रति जागरूक करने का प्रयास करता है। नवजात शिशुओं की देखभाल के प्रति जागरूक करने वाला दिन 1990 से हर साल मनाया जा रहा है और इसकी शुरुआत यूरोपीय देशों में हुई थी।
उस समय शिशुओं की मृत्यु दर बहुत ज्यादा थी, इसलिए ये जरूरी था कि माता-पिता को बताया जाए कि नवजात बच्चों की सही देखभाल कैसे करनी चाहिए ताकि उनकी जिंदगी सुरक्षित रहे। नवजात शिशुओं की देखभाल कैसे करनी चाहिए इसे लेकर एक्सपर्ट बताते है।
इन मिथकों को दूर कर रखें देखभाल
शिशु संरक्षण दिवस पर माता-पिता को नवजात बच्चे की सुरक्षा और स्वास्थ्य की देखभाल के बारे में जानकारी दी जाती है। कहा जाता है कि, वे मिथकों से दूरी बनाएं और अपने नन्हे का सही तौर पर ख्याल रखें।
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1- बच्चे की नाभि पर राख या हल्दी लगाना
सबसे पहला मिथ यह कहता है कि, बच्चे की उलनाल की देखभाल के लिए लोग राख, हल्दी या घी लगा देते हैं। ऐसा करना सही नहीं होता है। उलनाल को हमेशा साफ और सूखा रखना चाहिए, क्योंकि उस पर कुछ भी लगाने से इंफेक्शन हो सकता है।
2- शहद चटाना जरूरी
यहां पर दूसरा मिथ यह कहता है कि, जन्म के तुरंत बाद बच्चे को शहद चटाना अच्छा होता है, यह बिल्कुल गलत बात है।शहद में ऐसे टॉक्सिन्स होते हैं जो बच्चे की आंतों में इंफेक्शन कर सकते हैं और कई बार मौत तक का कारण बन सकते हैं। बच्चे को जन्म के बाद केवल मां का दूध पिलाना ही सही होता है।
3-बच्चे के कान या नाक में सरसों का तेल
तीसरा मिथ यह कहता है कि, बच्चे के कान या नाक की सुरक्षा के लिए सरसों का तेल डालें, ताकि ठंड या इंफेक्शन न हो। नवजात के लिए इस तरह का तरीका नुकसान पहुंचा सकता है। इससे बच्चे को कान, नाक और फेफड़ों का इंफेक्शन हो सकता है, यहां तक कि केमिकल निमोनिया तक हो सकता है।
4- मां का पीला गाढ़ा दूध
चौथा मिथ यह कहता है कि मां का पहला पीला गाढ़ा दूध गंदा होता है और उसे फेंक देना चाहिए, जबकि यही दूध बच्चे के लिए सबसे ज्यादा पौष्टिक और सुरक्षा देने वाला होता है। इसमें मौजूद एंटीबॉडीज बच्चे को हर बीमारियों से बचाती हैं, इसलिए इसे जरूर पिलाना चाहिए।
5- पानी या घुट्टी पिलाएं
पांचवा मिथ यह भी कहता है कि, नवजात शिशुओं को ऊपर से पानी या घुट्टी पीला देनी चाहिए, जबकि यह बिल्कुल गलत है। छह महीने तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध देना चाहिए, वही उसे पानी और पोषण दोनों देता है।
6- बच्चे को दस्त में कुछ ना दें
छठवां मिथ यह भी कहता है कि, जब बच्चे को डायरिया (दस्त) हो तो लोग कहते हैं कि उसे कुछ खिलाना-पिलाना बंद कर दो ताकि पेट आराम करे, लेकिन ऐसा करने से बच्चा डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का शिकार हो सकता है। ऐसे समय पर बच्चे को मां का दूध या हल्का तरल पदार्थ देते रहना चाहिए।
7- बच्चे की आंखों में काजल या सूरमा लगाएं
सातवां मिथ यह भी कहता है कि, बहुत से लोग अब भी बच्चे की आंखों में काजल या सूरमा लगाते हैं ताकि आंखें सुंदर दिखें, लेकिन आजकल के काजल में केमिकल होता है, जिससे बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है और आंखों में अल्सर भी बन सकते हैं, इसलिए ऐसा करना बिल्कुल छोड़ देना चाहिए।
8- टीका लगने के बाद नहलाएं नहीं
आठवां मिथ कहता है कि, कुछ लोग मानते हैं कि टीका लगने के बाद या बुखार में बच्चे को नहलाना नहीं चाहिए, जबकि सच्चाई यह है कि साफ-सुथरा रहना हमेशा फायदेमंद होता है। नहलाने से बच्चे को आराम मिलता है और संक्रमण कम होता है।
आईएएनएस के अनुसार
Avoid these parenting myths and take proper care of your child
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