क्या आप भी नजरअंदाज कर रहे हैं शरीर के ये छोटे बदलाव? स्ट्रोक का हमला होने से पहले दिमाग देता है ये 5 संकेत
Early Signs Of Stroke: आजकल बदलती लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण Stroke के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कई बार स्ट्रोक आने से पहले शरीर और दिमाग कुछ छोटे-छोटे संकेत देने लगते हैं।
- Written By: प्रीति शर्मा
ब्रेन स्ट्रोक (सौ. फ्रीपिक)
Stroke Warning Signs: स्ट्रोक या ब्रेन अटैक एक ऐसी जानलेवा स्थिति है जिसमें मस्तिष्क तक खून की सप्लाई रुक जाती है। समय पर इलाज न मिलना स्थायी विकलांगता या मौत का कारण बन सकता है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने अब बचाव नामक एक विशेष फॉर्मूला जारी किया है जिससे आम आदमी भी स्ट्रोक के लक्षणों को पहचान सकता है।
स्वास्थ्य जगत में ब्रेन स्ट्रोक को साइलेंट किलर माना जाता है क्योंकि यह बिना किसी चेतावनी के अचानक हमला करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रोक के मामले में समय ही मस्तिष्क है क्योंकि देरी होने पर हर मिनट लाखों ब्रेन सेल्स मर जाते हैं। इस खतरे को देखते हुए नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने लक्षणों की त्वरित पहचान के लिए बचाव फॉर्मूला साझा किया है।
क्या है बचाव फॉर्मूला
स्ट्रोक के मुख्य लक्षणों को इस चार अक्षरों के शब्द से आसानी से याद रखा जा सकता है।
सम्बंधित ख़बरें
Liver Detox: हेल्दी लिवर का राज़ क्या है? ये फल करेंगे लीवर को डिटॉक्स, आज़मा कर देखिए
Homemade Ubtan: शादी से पहले चेहरे पर आएगा नेचुरल ग्लो! इस खास तरीके से घर पर बनाएं उबटन
बच्चे के साथ अपनी सेहत का भी रखें ख्याल! डिलीवरी के बाद शुरुआती 6 हफ्तों में शरीर को मजबूत बनाएंगे ये नुस्खे
Lauki Recipes: नाश्ते में वही पराठा-पोहा खाकर हो गए हैं बोर? आज ही ट्राई करें लौकी से बनी ये 5 यूनिक रेसिपीज
ब (बाजू): यदि व्यक्ति की बाहों में कमजोरी महसूस हो। जांच के लिए दोनों हाथ ऊपर उठाने को कहें यदि एक हाथ नीचे गिर जाए तो यह स्ट्रोक का संकेत है।
च (चेहरा): व्यक्ति को मुस्कुराने के लिए कहें। यदि चेहरा एक तरफ से लटक जाए या टेढ़ा दिखे तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
आ (आवाज): बोलने में कठिनाई होना। यदि व्यक्ति तुतला रहा हो या सरल वाक्यों को दोहराने में असमर्थ हो तो यह बड़ा खतरा है।
व (वक्त): यदि ऊपर के कोई भी लक्षण दिखें तो वक्त बर्बाद न करें। तुरंत 108 नंबर पर कॉल करें और ऐसे नजदीकी अस्पताल पहुंचें जहां सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध हो।
यह भी पढ़ें:- Women’s Day 2026: इन 5 तरीकों को से अपने लाइफ की महिलाओं को सम्मान, यादगार बन जाएगा दिन
गोल्डन ऑवर की अहमियत
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार स्ट्रोक आने के शुरुआती कुछ घंटे गोल्डन ऑवर कहलाते हैं। यदि मरीज को सही समय पर अस्पताल पहुंचाया जाए तो क्लॉट-बस्टिंग दवाओं के जरिए मस्तिष्क के नुकसान को रोका जा सकता है और मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।
बचाव और सावधानियां
स्ट्रोक का खतरा शरीर के एक तरफ के हिस्से को अधिक प्रभावित करता है। इसके अन्य लक्षणों में अचानक संतुलन खोना, आंखों के सामने धुंधलापन या असहनीय सिरदर्द शामिल है। जीवनशैली में सुधार जैसे—ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और संतुलित आहार के जरिए इस जानलेवा हमले से 90% तक बचा जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए सुझाव केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें। नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
