नहाने का यह आयुर्वेदिक तरीका बढ़ा देगा आपकी उम्र और चमक! बस अपनाएं ये 3 स्टेप्स
Bathing Rules: भागदौड़ भरी जिंदगी में हम नहाना तो नहीं भूलते पर इसका सही तरीका भूल गए हैं। आयुर्वेद के अनुसार स्नान सिर्फ गंदगी साफ करना नहीं बल्कि एक चिकित्सा है जो सुस्ती और तनाव को खत्म कर सकता है।
- Written By: प्रीति शर्मा
नहाते हुए महिला (सौ. फ्रीपिक)
Ayurvedic Bathing Ritual: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर काम मशीन की तेजी से किया जा रहा है। खुद के लिए समय इतना कम है कि लोग खाना भी आराम से नहीं खा पाते और नहाने को तो महज एक काम समझकर जल्दबाजी में निपटा देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिसे आप केवल बाहरी सफाई समझ रहे हैं आयुर्वेद उसे संस्कार और चिकित्सा मानता है। सही विधि से किया गया स्नान न केवल तन को बल्कि मन को भी शुद्ध और ऊर्जावान बनाता है।
शरीर की अग्नि और मेटाबॉलिज्म का रक्षक
आयुर्वेद के अनुसार जब हमारे शरीर पर पानी पड़ता है तो पूरे शरीर में रक्त का संचार तेज हो जाता है। इसका सीधा संबंध हमारे शरीर के तापमान और पाचन शक्ति से है। नियमित स्नान से मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है और शरीर की जठराग्नि संतुलित होती है। यदि आप सुस्ती महसूस करते हैं या पाचन कमजोर है तो स्नान करने का सही तरीका आपके लिए किसी औषधि से कम नहीं है।
तनाव और कोर्टिसोल को करता है कम
आधुनिक शोध भी आयुर्वेद की इस बात की पुष्टि करते हैं कि स्नान करने से शरीर में एंडोर्फिन यानी हैप्पी हार्मोन का स्तर बढ़ता है। यह तनाव पैदा करने वाले हार्मोन कोर्टिसोल को कम करता है जिससे मन प्रसन्न रहता है। यदि आपको रात में नींद आने में परेशानी होती है तो गुनगुने पानी से स्नान आपके नर्वस सिस्टम को शांत कर गहरी नींद लाने में सहायक होता है।
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आयुर्वेद के 3 नियम
आयुर्वेद में स्नान की एक पूर्ण प्रक्रिया बताई गई है जिसे इन तीन चरणों में समझा जा सकता है।
- नहाने से कम से कम 15 मिनट पहले पूरे शरीर की तेल से मालिश करें। जैसे नवजात शिशु की मालिश की जाती है वैसे ही स्वयं की मालिश करने से त्वचा में निखार आता है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
- केमिकल युक्त साबुन के बजाय प्राकृतिक उबटन का प्रयोग करें। यह त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाकर नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है।
- स्नान के समय पवित्र मंत्रों का उच्चारण करना मन और मस्तिष्क के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह आपके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता है और मानसिक शांति देता है।
स्नान शरीर के तापमान को नियंत्रित करने और थकान मिटाने का सबसे सरल साधन है। यदि आप पूर्ण स्नान नहीं कर सकते तो कम से कम गुनगुने पानी में कुछ देर पैर डुबोकर रखें। आयुर्वेद के इन सरल नियमों को अपनाकर आप एक स्वस्थ और तनावमुक्त जीवन की शुरुआत कर सकते हैं।
