हरियाणा विधानसभा चुनाव (सोर्स:-सोशल मीडिया)
चंडीगढ़: हरियाणा में आने वाले 1 अक्टूबर को विधानसभा के चुनाव होने है, जिसको लेकर पूरे प्रदेशभर की राजनीति गर्म है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग जारी है। दोनों पार्टियां अपनी अपनी दावेदारी के लिए साम,दाम, दंड, भेद सभी प्रकार के हथकंडे अपना रही है। सवाल ये है कि चुनावी रण में बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस कौन सा दांव खेलने वाली है क्या कांग्रेस सीएम नयाब सिंह सैनी को हराने के लिए कांग्रेस नेता और प्रियंका गांधी की चहेती माने जाने वाली दलित नेता शैलजा कुमारी पर दांव खेलने वाली है, आईए इस चुनावी समीकरण को विस्तार में समझते है।
कांग्रेस लगातार रूप से देशभर में जातिगत जनगणना की मांग कर रही है। इस मांग को आधार बनाकर बीजेपी ने हरियाणा चुनाव में कांग्रेस को आड़ेहाथ लिया है। जहां हरियाणा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई ने कांग्रेस को चुनौती देते हुए बुधवार को कहा कि वह राज्य विधानसभा चुनावों के लिए कुमारी शैलजा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करे ताकि साबित हो सके कि वह अनुसूचित जाति (एससी) की कितनी बड़ी शुभचिंतक है।
हरियाणा चुनाव में गर्म हो रही राजनीति के बीच बीजेपी ने कहा कि वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से ताल्लुक रखने वाले नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करती है। भाजपा ने तो पिछड़े वर्ग से मुख्यमंत्री बना दिया। राहुल गांधी एससी वर्ग का खूब पक्ष रख रहे हैं, तो क्या कांग्रेस सैलजा जी को हरियाणा से मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित करे ताकि पता चले वह समाज के कितने शुभचिंतक हैं। सिरसा से सांसद सैलजा कांग्रेस का एक प्रमुख चेहरा हैं जो दलित समाज से आती हैं।
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ऐसा माना जा रहा है कि हरियाणा में कांग्रेस के पास शैलजा कुमारी हीं एक मात्र विकल्प है। सवाल ये है कि अगर शैलजा कुमारी सीएम चेहरा है तो भईया पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का क्या होगा। क्या कांग्रेस के लिए हुड्डा केवल एक कठपुतली बनकर रह जाएंगे। देखा जाए तो शैलजा कुमारी और हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच की मतभेद कांग्रेस के लिए समस्या का घर हो सकता है लेकिन सूत्रों की माने तो कांग्रेस अपना रास्ता साफ कर रही है और हो सकता है कि मतगणना के बाद अगर रिजल्ट कांग्रेस के अनुकुल रही तो कांग्रेस हरियाणा में कुछ बड़ा कर सकती है।
माना जाता है कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सैलजा के साथ मतभेद की भी खबरें लगातार सामने आ रही है। जिसको लेकर हुड्डा ने हाल ही में कहा था कि वह मैं न तो टायर्ड हैं और न रिटायर्ड हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि विधानसभा चुनावों में बहुमत मिलने के बाद कांग्रेस आलाकमान इस बात पर फैसला करेगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा? सिरसा से लोकसभा चुनाव जीतने के कुछ महीने बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री सैलजा ने आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा भी जताई थी और कहा था कि वह राज्य में काम करना चाहती हैं, लेकिन इस मामले पर अंतिम फैसला हाईकमान लेगा।
भाजपा की चुनौती पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की हरियाणा इकाई के अध्यक्ष उदय भान ने पीटीआई-भाषा से फोन पर कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी को अपनी चिंता करनी चाहिए, क्योंकि राज्य में उनकी सरकार जाने वाली है। मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के चयन के बारे में भान ने कहा कि कांग्रेस विधायक और पार्टी हाईकमान चुनाव परिणाम आने के बाद ही इस पर फैसला करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने पहले पंजाब और महाराष्ट्र सहित चार राज्यों में दलित समुदाय के नेताओं को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में आगे किया था।
इसके साथ ही भान ने कहा भाजपा को बताना चाहिए कि उन्होंने एससी समुदाय से किसे मुख्यमंत्री बनाया है? उसे यह भी बताना चाहिए कि क्या उसने राजस्थान में पिछला विधानसभा चुनाव लड़ते समय भजन लाल शर्मा को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित किया था? क्या उसने (मध्यप्रदेश में) मोहन यादव के चेहरे पर चुनाव लड़ा था? क्या उसने हरियाणा में 2014 में मनोहर लाल खट्टर को अपना चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा था?” उन्होंने कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीका राम जूली दलित समुदाय से आते हैं।
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भान ने कहा एक बात तो साफ है कि भाजपा ने मान लिया है कि हरियाणा में कांग्रेस सत्ता में आ रही है, उन्होंने कहा इसलिए वह एक अक्टूबर को मतदान की तिथि के आसपास कई अवकाश का बहाना बना रहे हैं और निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर मतदान कुछ दिन टालने के लिए कह रहे हैं। हम यह बात कह रहे हैं कि अगर एक अक्टूबर से पहले मतदान होता है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है और हम तैयार हैं। भाजपा की हरियाणा इकाई ने पिछले सप्ताह निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर विधानसभा चुनाव के लिए एक अक्टूबर को होने वाले मतदान को कुछ समय के लिए स्थगित करने का अनुरोध किया था। इसमें चुनाव तिथि से पहले और बाद में अवकाश का हवाला दिया गया था, जिससे मतदान में कमी आ सकती है।