PUNJAB HARYANA HIGH COURT AND HOODA (SOURCE- SOCIAL MEDIA)
Panchkula Plot Re-Allotment Case: पंचकूला में एक संस्थागत प्लॉट के पुन: आवंटन में कथित गड़बड़ि के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया है, यह मामला हरियाणा के पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा और सोनिया-राहुल गांधी से जुड़े एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड से जुड़ा हुआ है। अदालत ने आरोपियों को क्लिन चिट दे दी है।
साल 2005 में पंचकूला स्थित सेक्टर 6 में एक इंडस्ट्रियल प्लॉट को पुनः आवंटित किया गया था, जो साल 1982 में गांधी परिवार से जुड़े हुए एजेएल को भी आवंटित हुआ था। प्लॉट पर विकास ना होने की वजह से साल 1992 में इसे पुनः आवंटित का आदेश दे दिया जाता है, इसके बाद सीबीआई ने आरोप लगाया कि इस वजह से हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) को लगभग 63 लाख रूपय का नुकसान हुआ था और इसी आधार पर सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने आरोप तय किए थे।
अब इस मामले में जस्टिस त्रिभुवन दहिया की सिंगल बेंच ने कहा कि “अब तक उपलब्ध सामग्री से प्रारंभिक साक्ष्य में न तो आपराधिक साजिश का मामला बनता है और न ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध का आधार। इसके साथ ही हुड्डा व एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के खिलाफ आरोप तय करने व पूर्व सीएम हुड्डा की इस मामले में डिस्चार्ज एप्लीकेशन रद्द करने के सीबीआई कोर्ट के आदेश को भी रद्द कर दिया गया”।
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कोर्ट ने अपने आदेश में जांच एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। और कहा कि “सीबीआई ने केवल हुड्डा को आरोपी बनाया अन्य अधिकारियों को नहीं, यह उसकी मंशा पर सवाल उठाता है। पुनः आवंटन का आदेश अकेले हुड्डा का नहीं था। प्राधिकरण ने सर्वसम्मति से उसे अनुमोदित किया था। इस फैसले को किसी सक्षम अदालत या प्राधिकरण ने निरस्त भी नहीं किया। जब तक पुनः आवंटन को विधिक रूप से अवैध घोषित नहीं किया जाता तब तक केवल जांच एजेंसी के आकलन पर उसे अपराध नहीं माना जा सकता”।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस दहिया ने कहा कि “आज की तारीख में अलॉटमेंट वैलिड है, इसे कैंसिल भी नहीं किया गया, न ही इसे गैर-कानूनी या मनमाना घोषित किया गया। इसके बजाय, AJL ने री-अलॉटमेंट प्राइस और एक्सटेंशन फीस का पेमेंट करने के बाद कंस्ट्रक्शन शुरू कर दिया। फिर 14 अगस्त 2014 को अथॉरिटी ने उसे ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट दे दिया। अथॉरिटी को हुए किसी भी नुकसान के बारे में कोई शिकायत नहीं की गई; न ही AJL या किसी दूसरे आरोपी को किसी कथित नुकसान की भरपाई करने के लिए कहा गया। यहां तक कि सरकारी ऑडिटर्स ने भी इस री-अलॉटमेंट के कारण अथॉरिटी को हुए फाइनेंशियल नुकसान के बारे में अपनी आपत्ति वापस ली।”