MP Rajya Sabha Election: कांग्रेस आलाकमान का ‘ऑपरेशन अलर्ट’, कमलनाथ-सिंघार के बाद अरुण यादव दिल्ली तलब
Congress Rajya Sabha Candidate MP: बिहार-हरियाणा के झटकों से डरा 'दिल्ली दरबार', विधायकों की क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए दिग्गजों को सख्त अल्टीमेटम—"हर हाल में बचाओ अपनी सीट"
- Reported By: सुधीर दंडोतिया
कांग्रेस से राज्यसभा के संभावित दावेदार, सोर्स : नवभारत
MP Congress Rajya Sabha News: मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस आलाकमान इस बार कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। दूसरे राज्यों में हाल ही में मिले सियासी झटकों से कड़ा सबक लेते हुए दिल्ली दरबार ने एमपी कांग्रेस के बड़े नेताओं की घेराबंदी तेज कर दी है।
तीसरी सीट पर संभावित क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) के खतरे को टालने और अपनी तय सीट को सुरक्षित रखने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने राज्य के दिग्गजों को दिल्ली बुलाकर सीधे कमान अपने हाथ में ले ली है।
अरुण यादव अचानक दिल्ली तलब
चुनाव में किसी भी तरह की सेंधमारी या पाला बदलने के खेल को रोकने के लिए दिल्ली में मैराथन बैठकों का दौर चल रहा है। इसी कड़ी में आज पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को अचानक दिल्ली बुलाया गया है, जहां वे केंद्रीय नेतृत्व के साथ अहम बैठक करेंगे। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी दिल्ली दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। कांग्रेस इस चुनाव को लेकर कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को दो बार दिल्ली बुलाकर रणनीति और विधायकों की एकजुटता की जमीनी रिपोर्ट ली गई है।
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हाईकमान का दोटूक अल्टीमेटम
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, हाईकमान ने मध्य प्रदेश के सभी शीर्ष नेताओं को दोटूक शब्दों में कड़ा अल्टीमेटम दे दिया है। नेतृत्व का साफ और सख्त संदेश है कि—“अपनी राज्यसभा सीट हर हाल में बचाओ।” केंद्रीय आलाकमान ने नेताओं को आगाह किया है कि चुनाव में एक भी विधायक का वोट इधर-उधर नहीं होना चाहिए। इस बार किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता, लापरवाही या चूक को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अन्य राज्यों के कड़वे अनुभवों से सहमी कांग्रेस
कांग्रेस की इस अभूतपूर्व मुस्तैदी और कड़े रुख के पीछे हाल ही में अन्य राज्यों में मिले कड़वे अनुभव हैं। बिहार, हरियाणा और ओडिशा के राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग के कारण भारी सियासी नुकसान उठाना पड़ा था। मध्य प्रदेश में ऐसे किसी भी ‘खेल’ की आशंका को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रदेश कांग्रेस को ‘हाई अलर्ट’ पर रखा गया है और विधायकों की पल-पल की निगरानी की जा रही है।
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क्या कुनबे को एक जुट रख पाएगी कांग्रेस ?
अब देखना दिलचस्प होगा कि आलाकमान की इस सख्त घेराबंदी और ‘दिल्ली दरबार’ की कूटनीति के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस अपने कुनबे को एकजुट रखने और अपनी सीट बचाने में कितनी कामयाब हो पाती है।
