कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल, पूछा- 2 वोटर आईडी कैसे बनीं, जांच की मांग
Mithun Ahirwar Questions EC: मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने चुनाव आयोग और भाजपा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि SIR के बाद उन्हें 2 वोटर आईडी कैसे जारी कर दी गई। इसकी जांच हो।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
मिथुन अहिरवार (फोटो सोर्स- नवभारत)
Voter ID Controversy: मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिस प्रक्रिया को चुनाव आयोग ने पारदर्शी, निष्पक्ष और घर-घर सत्यापन आधारित बताया था, उसी प्रक्रिया ने लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
मिथुन अहिरवार ने बताया कि पिछली एसआईआर प्रक्रिया में उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। उस समय मीडिया द्वारा मामला उठाए जाने के बाद चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया था, लेकिन उनका नाम दोबारा जोड़ने के बजाय चुनाव आयोग ने उनके नाम से दो नई वोटर आईडी जारी कर दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों वोटर आईडी में नाम, पिता का नाम और पता पूरी तरह समान है, केवल वोटर आईडी नंबर अलग-अलग हैं।
2 नई वोटर आईडी कैसे जारी हुईं
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग लगातार दावा करता रहा है कि बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं। यदि वास्तव में ऐसा हुआ है तो फिर एक ही व्यक्ति के नाम पर दो नई वोटर आईडी कैसे जारी हो गईं? जब आधार कार्ड जैसे यूनिक पहचान दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, तब भी यह गंभीर त्रुटि कैसे हुई? आयोग यह भी बताए कि जारी की गई वोटर आईडी में से वैध कौन सी है और अवैध कौन सी?
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एक आदमी को 3-3 बार वोट डालने का अधिकार मिल गया?
उन्होंने चुनाव आयोग से यह भी पूछा कि कुछ समय पहले आयोग की ओर से कहा गया था कि जिन मतदाताओं के नाम पिछली सूची से हट गए हैं, वे अपने पुराने मतदाता पहचान पत्र के आधार पर मतदान कर सकेंगे। यदि ऐसा है तो क्या अब वे अपनी पुरानी वोटर आईडी और नई जारी दोनों वोटर आईडी के आधार पर मतदान करने के पात्र होंगे? क्या एक व्यक्ति को तीन-तीन वोट डालने का अधिकार मिल गया है?
निष्पक्ष जांच की मांग
मिथुन अहिरवार ने कहा कि यदि यह स्थिति एक राजनीतिक दल के प्रवक्ता के साथ हो सकती है, तो आम नागरिकों के साथ क्या हुआ होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। एक ही घर में कितने-कितने डुप्लीकेट वोटर जोड़े गए होंगे और कितने वास्तविक मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हुए होंगे, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
SIR में करोड़ों रुपए खर्च
उन्होंने कहा कि इस पूरी SIR पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए, लाखों लोगों का समय और संसाधन लगाए गए, लेकिन यदि परिणामस्वरूप मतदाता सूची में ऐसी गंभीर खामियां सामने आ रही हैं तो इस पूरी प्रक्रिया का औचित्य ही प्रश्नों के घेरे में आ जाता है।
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सार्वजनिक रूप से जवाब दे चुनाव आयोग
मिथुन अहिरवार ने भारतीय जनता पार्टी, उसके प्रवक्ताओं तथा चुनाव आयोग से मांग की है कि वे इस मामले पर सार्वजनिक रूप से जवाब दें और प्रदेश की जनता को बताएं कि मतदाता सूची में हुई इन गंभीर अनियमितताओं के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
