जब विजय अरोड़ा के चॉकलेटी लुक से डरने लगे थे राजेश खन्ना, बॉलीवुड की राजनीति ने बर्बाद किया करियर
Vijay Arora Death Anniversary: विजय अरोड़ा की पुण्यतिथि पर जानें उनके करियर के उतार-चढ़ाव। कैसे राजेश खन्ना को टक्कर देने वाला यह सितारा बॉलीवुड की अंदरूनी राजनीति का शिकार हुआ।
- Written By: अनिल सिंह
Vijay Arora Death Anniversary (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Vijay Arora: 70 के दशक का वह दौर जब राजेश खन्ना का जादू सिर चढ़कर बोल रहा था, तब फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसे अभिनेता की एंट्री हुई जिसने ‘सुपरस्टार’ की रातों की नींद उड़ा दी थी। हम बात कर रहे हैं विजय अरोड़ा की, जिनकी पुण्यतिथि 2 फरवरी को मनाई जाती है। 2007 में कैंसर की वजह से इस दिग्गज कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
लंबी कद-काठी, गोरा रंग और चॉकलेटी लुक्स की वजह से विजय अरोड़ा ने आते ही तहलका मचा दिया था। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि खुद राजेश खन्ना ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि अगर कोई अभिनेता उनकी जगह ले सकता है, तो वह केवल विजय अरोड़ा हैं।
FTII से गोल्ड मेडल जीतकर आए विजय अरोड़ा ने 1972 में फिल्म ‘जरूरत’ से अपना सफर शुरू किया। लेकिन साल 1973 में आई फिल्म ‘यादों की बारात’ ने उन्हें रातों-रात नेशनल क्रश बना दिया। जीनत अमान के साथ उन पर फिल्माया गया गाना ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ आज भी प्रेमियों की पहली पसंद है। इस फिल्म के बाद विजय अरोड़ा को ‘अगला राजेश खन्ना’ कहा जाने लगा, लेकिन यही तुलना शायद उनके करियर के लिए अभिशाप बन गई।
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राजेश खन्ना के साथ तुलना और इनसिक्योरिटी
विजय अरोड़ा की शक्ल और स्टाइल काफी हद तक राजेश खन्ना से मेल खाती थी। दोनों ने साथ में ‘रोटी’, ‘निशान’ और ‘सौतन’ जैसी फिल्मों में काम किया। हालांकि, इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि राजेश खन्ना की बढ़ती इनसिक्योरिटी और बॉलीवुड की अंदरूनी राजनीति ने विजय अरोड़ा के करियर को आगे बढ़ने से रोक दिया। बेहतरीन अभिनेता होने के बावजूद उन्हें मुख्य भूमिकाओं के बजाय साइड रोल मिलने लगे। विजय अरोड़ा ने खुद कई मौकों पर स्वीकार किया था कि वे फिल्म जगत की गंदी राजनीति का शिकार हुए हैं।
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‘रामायण’ के मेघनाद बनकर मिली अमर पहचान
जब बड़े पर्दे पर विजय अरोड़ा का जादू फीका पड़ने लगा, तब उन्होंने छोटे पर्दे का रुख किया। रामानंद सागर की ऐतिहासिक ‘रामायण’ में उन्होंने रावण के पुत्र ‘मेघनाद’ का किरदार निभाया। अपनी बुलंद आवाज और प्रभावशाली अभिनय से उन्होंने इस नकारात्मक किरदार को जीवंत कर दिया। आज भी लोग उन्हें मेघनाद के रूप में उतनी ही श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते हैं जितना भगवान राम और माता सीता के किरदारों को। यह उनकी प्रतिभा का ही कमाल था कि उन्होंने अपनी एक अलग पहचान घर-घर में स्थापित की।
100 से ज्यादा फिल्में और गुमनामी का सफर
विजय अरोड़ा ने अपने करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों और दर्जनों टीवी सीरियल्स में काम किया। उन्होंने आशा पारेख, रीना रॉय और जीनत अमान जैसी उस दौर की हर बड़ी हीरोइन के साथ स्क्रीन शेयर की। हालांकि, जिस बुलंदी के वे हकदार थे, वह उन्हें नहीं मिल सकी। 2007 में कैंसर की वजह से इस दिग्गज कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया। आज उनकी पुण्यतिथि पर सिनेमा प्रेमी उस कलाकार को याद कर रहे हैं, जो अगर राजनीति का शिकार न होता, तो शायद भारतीय सिनेमा का इतिहास कुछ और ही होता।
