विजय की ‘जन नायकन’ को सेंसर सर्टिफिकेट में देरी, मद्रास हाईकोर्ट ने मांगी शिकायत की फाइल
Thalapathy Vijay की फिल्म 'जन नायकन' की रिलीज से पहले सेंसर सर्टिफिकेट पर विवाद। मद्रास हाईकोर्ट ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली शिकायत की कॉपी CBFC से मांगी। फिल्म 9 जनवरी को रिलीज होनी है।
- Written By: अनिल सिंह
Jan Nayakan Film Poster (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Jan Nayakan Censor Certificate: अभिनेता-राजनेता थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ की 9 जनवरी की निर्धारित रिलीज से ठीक पहले सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म को अभी तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से सर्टिफिकेट नहीं मिला है।
इस मुद्दे पर फिल्म के प्रोडक्शन हाउस केवीएन प्रोडक्शंस ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें कोर्ट से सेंसर बोर्ड को फौरन सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है। यह फिल्म करीब 500 करोड़ के बड़े बजट से बनी है और विजय की बतौर लीड एक्टर आखिरी फिल्म मानी जा रही है।
विवाद का कारण: धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की शिकायत
प्रोडक्शन कंपनी के अनुसार, फिल्म को दिसंबर में ही सेंसर बोर्ड को सर्टिफिकेट के लिए सौंप दिया गया था।
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पहला मूल्यांकन: बोर्ड ने कुछ सीन काटने और कुछ डायलॉग म्यूट करने के सुझाव दिए, जिन्हें मानकर फिल्म जन नायकन को फिर से सब्मिट किया गया।
दूसरा मूल्यांकन: दूसरी जांच के बाद बोर्ड ने इसे यू/ए सर्टिफिकेट के लिए उपयुक्त बताया।
शिकायत: इसी बीच, एक शिकायत में आरोप लगाया गया कि थलपति विजय की फिल्म धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। इस आधार पर बोर्ड ने फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया।
प्रोडक्शन कंपनी का तर्क है कि शिकायत करने वाले ने फिल्म देखी ही नहीं है, तो ऐसे आरोप कैसे लगाए जा सकते हैं? इसलिए बिना देरी के सर्टिफिकेट जारी किया जाना चाहिए।
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मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई
जस्टिस पी.टी. आशा की बेंच में इस याचिका पर सुनवाई हुई।
सेंसर बोर्ड का पक्ष: सेंसर बोर्ड की ओर से कहा गया कि शिकायत मिलने पर फिल्म को दोबारा जांचना जरूरी है और तय समय सीमा में सर्टिफिकेट जारी करने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता। बोर्ड ने कानून का हवाला देते हुए कहा कि प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
कोर्ट का निर्देश: दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जज ने सेंसर बोर्ड को निर्देश दिया कि फिल्म के खिलाफ आई शिकायत की कॉपी कोर्ट में जमा की जाए। सुनवाई को एक दिन के लिए टाल दिया गया।
रिलीज पर सवाल: जज ने प्रोडक्शन कंपनी से पूछा कि रिलीज को 10 जनवरी तक क्यों नहीं टाला जा सकता? कंपनी की ओर से वकील ने जवाब दिया कि रिलीज डेट पहले ही घोषित हो चुकी है और बदलना मुश्किल है।
सेंसर बोर्ड के वकील ने जोर देकर कहा कि रिलीज डेट तय होने के बावजूद फिल्म सिर्फ कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर ही रिलीज हो सकती है।
