दिव्यांगों पर भद्दे कमेंट्स पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, समय रैना को दी सोशल पेनल्टी
Supreme Court Strict Action Samay Raina: सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगों और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाने वाले समय रैना सहित पांच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर सख्त रुख अपनाया है।
- Written By: सोनाली झा
दिव्यांगों पर भद्दे कमेंट्स पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, समय रैना को दी सोशल पेनल्टी
Samay Raina Disabled Comments Case: दिव्यांगों और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे लोगों का मज़ाक उड़ाने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कॉमेडियंस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। समय रैना सहित पांच इन्फ्लुएंसर्स को अदालत ने आदेश दिया है कि वे हर महीने कम से कम दो कार्यक्रम या लाइव शो आयोजित करें, जिनमें दिव्यांग व्यक्तियों की सफलता की कहानियां साझा की जाएं और उनके इलाज के लिए फंड जुटाया जाए। कोर्ट ने इस फैसले को ‘सोशल पेनल्टी’ बताया है।
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अदालत ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति की विकलांगता पर टिप्पणी करना सिर्फ असंवेदनशीलता नहीं, बल्कि मानव गरिमा का स्पष्ट उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ माफी मांग लेना ऐसे मामलों में पर्याप्त नहीं हो सकता। जब किसी मजाक से किसी समुदाय की पीड़ा बढ़ती है, तो जवाबदेही निभाना और समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करना आवश्यक हो जाता है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने निर्देश दिया कि इन कार्यक्रमों में दिव्यांग समुदाय से जुड़े वे लोग भी शामिल हों जिन्होंने कठिनाइयों के बावजूद उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को संवेदनशील बनाने और दिव्यांगों के प्रति सम्मान बढ़ाने का प्रभावी तरीका हैं। सीजेआई ने कहा कि अगर समय रैना व अन्य इन्फ्लुएंसर्स वास्तव में पछतावा दिखाना चाहते हैं, तो उन्हें अपने विशाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एक पॉसिटिव दिशा में उपयोग करना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह जरूरी है कि दिव्यांग लोगों की आवाज़ को प्रमुखता दी जाए, ताकि समाज उनकी चुनौतियों और उपलब्धियों को बेहतर तरीके से समझ सके। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि SMA जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित कई बच्चे आज भी क्राउडफंडिंग के जरिए इलाज का पैसा जुटाने को मजबूर हैं। ऐसे में लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर्स की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे इस दिशा में मदद करें और जागरूकता फैलाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह आदेश कोई दंड नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर है। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि अगली सुनवाई से पहले समय रैना और अन्य इन्फ्लुएंसर्स दिव्यांग समुदाय के लिए प्रभावी और प्रेरक कार्यक्रम आयोजित करेंगे, जिससे समाज में संवेदनशीलता और सम्मान का वातावरण मजबूत हो सके।
