Birth Anniversary: लता मंगेशकर से नहीं गवाया एक भी गाना, ओपी नैयर थे सबसे महंगे संगीतकार!
हिन्दी सिनेमा के कई ऐसे सिंगर और म्यूजिक कंपोजर है जिसे लोग आज भी याद करते हैं। इसमें से एक हाइएस्ट पेड संगीतकार ओमकार प्रसाद नैयर है। जिसे ओ.पी. नैयर के नाम से जाना जाता हैं। आज यानी 16 जनवरी को उनकी बर्थ एनिवर्सरी है।
- Written By: स्नेहा मौर्या
ओपी नैयर बर्थ एनिवर्सरी (फोटो-सोर्स, सोशल मीडिया)
मुंबई: हिन्दी सिनेमा के पुराने दौर में कई ऐसे सिंगर और म्यूजिक कंपोजर है। जिनके गाने लोग आज भी पसंद करते हैं। उनमे से एक जाने-माने संगीतकार ओमकार प्रसाद नैयर है। इनके गाने आज भी कहीं बजे तो लोगों को सुकून दे देते हैं। हालांकि, आज यानी 16 जनवरी को उनकी बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास मौके पर हम आपको उनसे जुड़ा अनाखो किस्सा बताने जा रहे हैं।
दरअस, ओमकार प्रसाद नैयर इंडस्ट्री के सबसे हाइएस्ट पेड संगीतकार है और उन्हें पूरी इंडस्ट्री में ओ.पी. नैयर के नाम से जाना जाता हैं। ओमकार प्रसाद नैयर एक ऐसे संगीतकार रहे है। जिन्होंने शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा नहीं प्राप्त की थी, लेकिन जब वो किसी गीत के लिए संगीत तैयार करते थे तो उसमें रागों का इस्तेमाल इतनी खूबसूरती से करते थे कि लोग जन्मों जन्म तक के लोगों इस बात का अनुमान नहीं होता था कि उन्होंने रागों की व्यवस्थित शिक्षा ग्रहण नहीं की।
वहीं एक दिलचस्प किस्सा आपको बताएं, तो साल 1952 में आई फिल्म ‘आसमान’ के लिए ओपी नैयर ने लता मंगेशकर से गाना बनवाने की कोशिश की थी और ओपी नैयर चाहते थे कि लता मंगेशकर मुख्य अभिनेत्री के बजाय सहायक अभिनेत्री के लिए गाएं। लेकिन लता मंगेशकर को यह प्रस्ताव पसंद नहीं आया और लता मंगेशकर ने गाना गाने से इनकार कर दिया। फिर ओपी नैयर ने फैसला किया कि वह लता मंगेशकर के साथ कोई गाना नहीं बनाएंगे।
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आपको बता दें, ओमकार प्रसाद नैयर का जन्म 16 जनवरी, 1926 हुआ था। वहीं अविभाजित भारत के लाहौर में जन्में नैय्यर बचपन से ही संगीत में रुचि थी। उनके परिवार के लोग उनको संगीत की तरफ जाने से रोकते रहे थे। लेकिन उनको लगता था कि अगर वे संगीत से दूर हो गए तो पढ़ाई में मन लगेगा। हालांकि, नैयर का मन तो संगीत में भर चुका था। 17 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने एचएमवी के लिए कबीर वाणी कंपोज की थी, लेकिन वो पसंद नहीं की गई। बावजूद इसके उन्होंने एक प्राइवेट एल्बम ‘प्रीतम आन मिलो’ कंपोज किया, जिसमें सी. एच. आत्मा ने आवाज दी।
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ओ. पी. नैयर की बात करें, तो वो एक ऐसे संगीतकार थे, जिन्होंने हारमोनियम, सितार, गिटार, बांसुरी, तबला, ढोलक, संतूर, माउथआर्गन और सेक्सोफोन आदि का जमकर इस्तेमाल किया। इन वाद्ययंत्रों के साथ जब वो प्रयोग करते थे तो गीत के एक-एक शब्द का ध्यान रखते थे। ये बहुत कम लोगों को पता है कि नैयर होम्योपैथ और ज्योतिष के भी अच्छे जानकार थे।
