लता मंगेशकर और आशा भोंसले (फोटो-सोशल मीडिया)
Lata Mangeshkar Asha Bhosle Relationship: भारतीय संगीत जगत की दो सबसे बड़ी आवाजें लता मंगेशकर और आशा भोंसले को लेकर सालों से एक सवाल उठता रहा है कि क्या लता मंगेशकर के प्रभाव ने आशा भोसले के करियर को दबाया? हालांकि, इस सवाल का जवाब खुद आशा भोसले और लता मंगेशकर कई बार दे चुकी हैं। मंगेशकर परिवार से ताल्लुक रखने वाली दोनों बहनों पर उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर का गहरा प्रभाव था। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी लता मंगेशकर ने संभाली और तेजी से इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई।
वहीं आशा भोसले को शुरुआत में संघर्ष करना पड़ा। इसी असमान शुरुआत के कारण दोनों के बीच तुलना होने लगी, जिससे कई तरह की अफवाहें भी जन्म लेने लगीं। आशा भोसले की कम उम्र में शादी और निजी जीवन की परेशानियों ने उन्हें परिवार से दूर कर दिया। इस दौरान दोनों बहनों के बीच दूरी बढ़ी, जिसे लोगों ने ‘राइवलरी’ का नाम दे दिया। हालांकि, सच्चाई यह थी कि दोनों अपने-अपने रास्ते पर आगे बढ़ रही थीं और अपनी अलग पहचान बना रही थीं।
जहां लता मंगेशकर को मधुर और पारंपरिक गीतों के लिए जाना गया, वहीं आशा भोसले ने कैबरे, गजल, पॉप और एक्सपेरिमेंटल गानों में अपनी खास पहचान बनाई। आशा भोसले ने आरडी बर्मन और ओपी नैयर जैसे संगीतकारों के साथ काम कर नए-नए प्रयोग किए, जिससे उनकी अलग छवि बनी। आशा भोसले ने खुद कई इंटरव्यू में कहा था कि उनके और लता मंगेशकर के बीच कभी कटु प्रतिस्पर्धा नहीं रही, बल्कि यह एक ‘हेल्दी कॉम्पिटिशन’ था।
लता मंगेशकर ने भी साफ कहा था कि अगर वह आशा का करियर दबाना चाहतीं, तो वह इतनी बड़ी गायिका कैसे बन पातीं। आशा भोसले ने हमेशा लता मंगेशकर को अपनी गुरु और मां समान बताया। दोनों ने साथ में 80 से ज्यादा गाने गाए और एक-दूसरे की कला का सम्मान किया। सच्चाई यह है कि लता और आशा के बीच कोई दुश्मनी नहीं, बल्कि सम्मान और प्रेरणा का रिश्ता था। दोनों ने मिलकर हिंदी संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल कायम की।