नवभारत संपादकीय: मस्ती भरे गीतों की साम्राज्ञी थीं आशा भोसले, 8 दशक की शानदार यात्रा
Asha Bhosle Songs: आशा भोसले ने चुलबुले और जोशीले अंदाज से लता मंगेशकर से अलग पहचान बनाई। कैबरे से भावगीत तक, उनकी 8 दशक लंबी संगीत यात्रा बेमिसाल रही।
- Written By: अंकिता पटेल
आशा भोसले( सोर्स: सोशल मीडिया )
Asha Bhosle Music Journey: आशा भोसले का चुलबुला और जोशीला अंदाज अपनी दीदी स्वर कोकिला लता मंगेशकर से अलग उन्हें करता था। उनकी एक अलग रिदम थी। हिंदी फिल्मों के अधिकांश कैबरे गीतों को मादक स्वर देने वाली आशा भोसले की बेमिसाल प्रतिभा यह थी कि वह मराठी फिल्मों के गंभीर भावगीत भी उसी शिद्दत से गाती थीं।
उन्होंने अपने गायन में लता से अलग जमीन तलाशी और खुद का मुकाम हासिल किया। आशा भोसले की 8 दशक तक चली संगीत यात्रा कितने ही पड़ावों से होकर गुजरी।
उनकी प्रतिभा को ओपी नैयर ने संवारा और अपने संगीत निर्देशन वाली हर फिल्म में आशा से ही गवाया। फिर पंचम (आरडी बर्मन) से उनकी लाजवाच ट्यूनिंग रही। 1960 से 70 के दशक में आशा भोसले की आवाज का जादू युवामन की धड़कनें तेज कर रहा था।
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उस समय जैज, रॉक व डिस्को का तूफानी तालमेल करते हुए हाई बीट वाला संगीत शबाब पर था। तब आशा भोसले ने पिया तू अब तो आ जा (कारवां), आजा आजा तू है प्यार मेरा (तीसरी मंजिल), दम मारो दम, मिट जाए गम (हरे रामा हरे कृष्णा, चुरा लिया है तुमने जो दिल तो, नजर नहीं चुराना सनम (यादों की बारात) जैसे सम्मोहित कर देने वाले गीत गाकर संगीत की दुनिया में धमाका कर दिया।
फिल्म ‘हावड़ा ब्रिज’ में मधुबाला पर फिल्माया गया गीत ‘आइए मेहरबां बैठिए जानेजां, शौक से लोजिए इश्क के इम्तिहां’ काफी लोकप्रिय हुआ था। आशा के गाए गीत व हेलन के फड़कते वेस्टर्न डान्स का कॉम्बिनेशन जादू पैदा कर देता था, विविधता आशा भोसले की खासियत थी।
1981 की फिल्म ‘उमराव जान’ में रेखा पर फिल्माई गई गजल ‘दिल चीज क्या है, आप मेरी जान लीजिए, बस एक बार मेरा कहा मान लीजिए’ को आशा भोसले ने बड़े ही पुरअसर तरीके से गाया था।
वह नदी की ऐसी वेगवान धारा के समान थीं जो अलग-अलग तटों का स्पर्श कर अपनी राह बनाते आगे बढ़ती है। गुलाम अली व हरिहरन के साथ उन्होंने बेहतरीन गजलें गाई।
तब कौन कह सकता था कि उर्मिला मातोंडकर के लिए फिल्म रंगीला में ‘याई रे याई रे जोर लगा के नाची रे’ गीत भी आशा भोसले ने गाया होगा, उनके गाए उल्लेखनीय मराठी भावगीत हैं ‘दिसं जातील दिसं येतील, भोग सरंल, सुख येईल’, ‘भातुकलीच्या खेळामधली राजा आणि राणी’, ‘फिटे अंधाराचे जाळे, झाले मोकळे आकाश’, अपनी दीदी के समान 92 वर्ष की दीर्घायु पाने वाली आशा भोसले का जोश-ए-जुनून इतना जबरदस्त था कि 2023 में अपने 90 वें जन्मदिन पर उन्होंने दुबई में एक बड़ा शो किया था।
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उन्हें अपनी कला के लिए दादासाहेब फाल्के अवार्ड, पद्म विभूषण व महाराष्ट्र भूषण से नवाजा गया था। उनके निधन से संगीत की दुनिया का चमकता नक्षत्र अनंत में विलीन हो गया। अपने मधुर, फड़कदार व गर्मजोशी भरे गीतों से आशा अमर रहेंगी। उनका जीवन हिंदी फिल्म संगीत की विकास यात्रा थी।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
