Vyjayanthimala Birthday: जब नरगिस ने वैजयंतीमाला को कहा खंभा, आंखों में आ गए थे आंसू

Vyjayanthimala Story: वैजयंतीमाला ने अपनी बायोग्राफी में एक किस्सा शेयर किया, जब दिल्ली के एक कार्यक्रम में नरगिस ने उन्हें ऑटोग्राफ देने से मना करवा दिया और लंबाई के कारण खंभा कहकर मजाक उड़ाया।
जब नरगिस ने वैजयंतीमाला को कहा खंभा, आंखों में आ गए थे आंसू
वैजयंतीमाला (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Vyjayanthimala Birthday Special: 50 और 60 के दशक में अपनी अदाकारी और नृत्य कला से दर्शकों का दिल जीतने वाली वैजयंतीमाला न केवल एक बेहतरीन अदाकारा थीं, बल्कि सादगी और आत्मसम्मान की प्रतीक भी मानी जाती हैं। वैजयंतीमाला का जन्म 13 अगस्त 1936 को चेन्नई में हुआ था। वैजयंतीमाला आज अपना 92वां जन्मदिन मना रही हैं।

वैजयंतीमाला ने अपनी बायोग्राफ 'बॉन्डिंग: एक मेमोयर' में दिल्ली के एक इवेंट का जिक्र किया है, जहां उनकी पहली मुलाकात राज कपूर और नरगिस से हुई। इस कार्यक्रम में बड़े-बड़े सितारों की मौजूदगी उनके लिए रोमांचक थी, लेकिन यहीं उन्हें एक कड़वा अनुभव भी हुआ। वैजयंतीमाला के पास लोग ऑटोग्राफ लेने आने लगे, तभी नरगिस ने राज कपूर से कहा कि वे जाकर उन्हें ऑटोग्राफ देने से मना करें। राज कपूर ने यह संदेश उन्हें दे दिया। हालांकि उन्होंने सिर हिलाकर हामी भर दी, लेकिन इस व्यवहार से वे आहत हुईं।

नरगिस ने बनाया मजाक

अन्नू कपूर ने अपने शो में इस किस्से का एक और पहलू बताया। उनके अनुसार, वैजयंतीमाला की लंबाई देखकर नरगिस ने मजाक में उन्हें 'खंभा' और 'पेड़' कह दिया। यह सुनकर उनकी आंखों में आंसू आ गए और ग्रुप फोटो में वे घुटने मोड़कर खड़ी हो गईं। घर लौटकर वे उदास थीं, लेकिन उनकी मां ने उन्हें समझाया कि आलोचनाओं का जवाब अपने काम से देना चाहिए।

वैजयंतीमाला की फिल्में

वैजयंतीमाला ने 'नागिन', 'देवदास', 'मधुमती', 'संगम' और 'साधना' जैसी फिल्मों में यादगार किरदार निभाए। 'देवदास' में चंद्रमुखी का रोल उन्होंने निभाया, जिसे कई बड़ी अभिनेत्रियों ने करने से मना कर दिया था। इस किरदार के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया क्योंकि वे मानती थीं कि यह अवॉर्ड लीड एक्ट्रेस के रूप में दिया जाना चाहिए था, न कि सपोर्टिंग रोल के लिए।

वैजयंतीमाला का करियर

अपने करियर में वैजयंतीमाला को पांच फिल्मफेयर अवॉर्ड और 1968 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने न केवल अभिनय बल्कि कोरियोग्राफी और फिल्म निर्माण में भी योगदान दिया। 1982 में उन्होंने तमिल फिल्म 'कथोदुथन नान पेसुवेन' का सह-निर्माण किया। 1984 में राजनीति में कदम रखते हुए वे सांसद बनीं, बाद में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं और तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय रहीं।

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