Mumbai Entertainment Capital (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Mumbai, Entertainment Capital: मुंबई केवल रहने के लिए एक शहर नहीं है, बल्कि यह एक अहसास है जिसे आप महसूस करते हैं, जिसके साथ आप कभी संघर्ष करते हैं तो कभी बेपनाह मोहब्बत। यह वह शहर है जहाँ सिनेमा किसी धर्म से कम नहीं है।
संगीत, कला, फैशन और अभिनय यहाँ की हवा में घुले हुए हैं। यहाँ कपूर खानदान का बंगला केवल एक पता नहीं बल्कि सांस्कृतिक धरोहर है, और ‘जल्सा’ की बालकनी से अमिताभ बच्चन का हाथ हिलाना या ‘मन्नत’ के बाहर शाहरुख खान का दीदार करना प्रशंसकों के लिए किसी रस्म से कम नहीं है। मुंबई में शोहरत दूर की कौड़ी नहीं, बल्कि पड़ोस जैसा अहसास कराती है। यहाँ मनोरंजन केवल पलायन नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक सचेत तरीका है।
मुंबई का बड़े आयोजनों के साथ नाता नया नहीं है। 90 के दशक में माइकल जैक्सन का दौरा एक मील का पत्थर था, जिसने साबित किया कि बुनियादी ढांचा पूरी तरह विकसित न होने के बावजूद यह शहर वैश्विक उम्मीदों पर खरा उतर सकता है। पिछले कुछ वर्षों में यह सिलसिला और तेज हुआ है। आज जब कोल्डप्ले (Coldplay) लगातार तीन रातों तक खचाखच भरे स्टेडियम में गाते हैं, या एड शीरन और दिलजीत दोसांझ एक साथ मंच साझा करते हैं, तो यह केवल एक शो नहीं बल्कि वैश्विक मानचित्र पर भारत की धमक का संकेत होता है। लोलापालूजा (Lollapalooza) और सनबर्न (Sunburn) जैसे अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल्स अब यहाँ के कैलेंडर का हिस्सा बन चुके हैं।
मुंबई की असली ताकत केवल इन आयोजनों का पैमाना नहीं, बल्कि उन्हें आयोजित करने का तरीका है। यहाँ बड़े कार्यक्रमों को अब केवल कागजी कार्यवाही और अनुमति के बोझ के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि इन्हें शहर के व्यापार, संस्कृति और आजीविका को बढ़ावा देने वाले ‘सिटी-वाइड ऑपरेशंस’ के रूप में अपनाया जाता है। प्रशासन और आयोजकों के बीच ऐसा तालमेल दिखता है कि भारी भीड़, सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं के लिए पहले से ही पुख्ता प्रोटोकॉल तैयार रहते हैं। जब कोल्डप्ले जैसा बड़ा शो होता है, तो शहर का परिवहन तंत्र भी अपनी भूमिका निभाता है; लोकल ट्रेनों के फेरे बढ़ा दिए जाते हैं और बसों को देर रात तक चलाया जाता है।
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चाहे एनरिक इग्लेसियस का बीकेसी (BKC) में हुआ कंसर्ट हो या भारतीय क्रिकेट टीम की विश्व कप जीत का जश्न, मुंबई पुलिस और नागरिक प्रशासन की कार्यकुशलता पर्दे के पीछे से सब कुछ संभाल लेती है। एनरिक के शो के दौरान 500 सुरक्षाकर्मियों और 200 ट्रैफिक मार्शलों की तैनाती ने यह सुनिश्चित किया कि हजारों प्रशंसकों की मौजूदगी के बावजूद यातायात सुचारू रहे। आज मुंबई मेट्रो और बेस्ट (BEST) की विस्तारित सेवाएं बड़े वेन्यू जैसे नेस्को (Nesco), महालक्ष्मी रेसकोर्स और इन्फिनिटी बे (Infinity Bay) तक पहुंच को आसान बनाती हैं।
मुंबई की सामूहिक भावनाओं को सहेजने की क्षमता अद्भुत है। लियोनेल मेस्सी जैसे वैश्विक सितारों की मौजूदगी के दौरान भी वानखेड़े और ब्रेबोर्न स्टेडियमों में सुरक्षा के ऐसे इंतजाम रहे कि शहर की रफ्तार भी नहीं थमी और आयोजन भी सुरक्षित रहा। मरीन ड्राइव पर टी20 विश्व कप की विजय परेड के दौरान उमड़ा जनसैलाब इसका बेहतरीन उदाहरण है। जहाँ लाखों की भीड़ थी, वहीं रूट मैप, रोड क्लोजर और सटीक सूचना तंत्र के जरिए प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि खुशी का यह माहौल कभी अव्यवस्था में न बदले।
इतने भव्य आयोजनों के बीच मुंबई अपनी छोटी सांस्कृतिक जड़ों को भी नहीं भूलती। यहाँ एक तरफ जहां बड़े कंसर्ट्स की गूँज होती है, वहीं दूसरी तरफ स्वतंत्र आर्ट गैलरी, बुक रीडिंग और थिएटर रिहर्सल की सक्रियता भी बनी रहती है। शाम ढलते ही मरीन ड्राइव पर परिवारों की बातचीत और कारों से छनकर आता संगीत इस शहर की रूह को जीवंत रखता है। मुंबई का ‘रहने योग्य’ (Liveable) शहर से ‘प्यार करने योग्य’ (Loveable) शहर बनने का यह सफर धीरे-धीरे मगर मजबूती से जारी है, जो अपनी बहुआयामी लय में हर किसी को बांध लेता है।