कंगना रनौत पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, बठिंडा कोर्ट ने पेश ना होने पर जारी किया वारंट

Kangana Ranaut: किसान महिंदर कौर पर टिप्पणी के मानहानि केस में कंगना रनौत को बठिंडा कोर्ट ने 15 जनवरी को पेश होने का आदेश दिया है। पेश न होने पर गिरफ्तारी वारंट जारी होगा।
Kangana Ranaut Bathinda Court
Kangana Ranaut Bathinda Court (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
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Kangana Ranaut Warrant: अभिनेत्री कंगना रनौत को किसान आंदोलन के दौरान महिंदर कौर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में बठिंडा कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।

कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें 15 जनवरी को हर हाल में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाएगा।

15 जनवरी को पेश होना जरूरी

मानहानि केस में जानकारी देते हुए, बेबे महिंदर कौर के वकील रघुबीर सिंह बहनीवाल ने बताया:

अर्जी खारिज: कंगना रनौत के वकील ने पेशी से छूट के लिए एक अर्जी दायर की थी, जिसे बठिंडा कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

गिरफ्तारी वारंट का खतरा: अगर कंगना रनौत 15 जनवरी को कोर्ट में पेश नहीं होती हैं, तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाएगा। इसके साथ ही, उनका बेल ऑर्डर भी खारिज कर दिया जाएगा।

कड़े तेवर: पिछली सुनवाई के दौरान ही कोर्ट ने कड़े तेवर दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया था कि इस बार उन्हें हर हाल में हाजिर होना पड़ेगा।

जानिए क्या है पूरा मामला

यह पूरा मामला साल 2021 का है, जब दिल्ली की सीमाओं पर केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ ऐतिहासिक किसान आंदोलन चल रहा था।

विवादित टिप्पणी: उस दौरान कंगना रनौत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (तब ट्विटर) पर एक बुजुर्ग महिला की तस्वीर साझा करते हुए एक विवादित ट्वीट किया था।

भ्रम: कंगना ने बठिंडा के गांव बहादुरगढ़ जंडिया की रहने वाली 87 वर्षीय बुजुर्ग किसान महिंदर कौर को शाहीन बाग की 'दादी' समझ लिया था।

आपत्तिजनक पोस्ट: उन्होंने ट्वीट में लिखा था, "ऐसी महिलाएं 100-100 रुपये में धरने में शामिल होने के लिए उपलब्ध हैं।"

मानहानि का मुकदमा: इस टिप्पणी ने न केवल महिंदर कौर बल्कि पूरे किसान समुदाय की भावनाओं को आहत किया था। महिंदर कौर ने इसे अपनी छवि धूमिल करने वाला बताते हुए कंगना के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

कंगना रनौत ने कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में इस केस को खत्म करने की बात कही थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उन्हें कोई मंजूरी नहीं दी। अब उन्हें बठिंडा कोर्ट के आदेश का पालन करना होगा।

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