Javed Akhtar Birthday: फुटपाथ पर कटी रातें, जेब में थे चंद पैसे, फिर भी नहीं टूटा जावेद अख्तर का हौसला
Javed Akhtar Journey: कभी जेब में सिर्फ 27 पैसे लेकर मुंबई आए जावेद अख्तर ने फुटपाथ पर रातें गुजारीं, लेकिन मेहनत और आत्मविश्वास से ‘सलीम-जावेद’ के रूप में हिंदी सिनेमा को अमर फिल्में और गीत दिए।
- Written By: सोनाली झा
जावेद अख्तर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Javed Akhtar Struggle Story: बॉलीवुड के दिग्गज गीतकार, कवि और पटकथा लेखक जावेद अख्तर आज जिस मुकाम पर हैं, वहां पहुंचना आसान नहीं था। उनके गीतों और शायरी में जो गहराई और जीवन का दर्शन दिखाई देता है, उसके पीछे संघर्ष, अभाव और अनुभवों की लंबी यात्रा छिपी है। कभी जेब में महज 27 पैसे लेकर मुंबई पहुंचे जावेद अख्तर ने अपने हौसले और मेहनत के दम पर न सिर्फ खुद को साबित किया, बल्कि भारतीय सिनेमा को ऐसी कहानियां और गीत दिए जो आज भी अमर हैं।
जावेद अख्तर का जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में हुआ था। उनका परिवार साहित्य और शायरी से जुड़ा हुआ था। पिता जान निसार अख्तर और दादा मजाज लखनवी जैसे शायरों की विरासत ने बचपन से ही जावेद के भीतर शब्दों के प्रति प्रेम पैदा कर दिया। हालांकि, बचपन में उन्होंने गरीबी और सामाजिक अंतर को भी करीब से देखा। दोस्तों की महंगी चीजें देखकर उन्होंने तय कर लिया था कि वे एक दिन सफल और आत्मनिर्भर बनेंगे।
कई रातें फुटपाथ पर गुजारी
पढ़ाई पूरी करने के बाद 1964 में जावेद अख्तर सपनों की नगरी मुंबई पहुंचे। यहां न कोई पहचान थी और न ही सहारा। शुरुआती दिनों में उन्होंने कमाल अमरोही के स्टूडियो में वक्त बिताया और कई रातें फुटपाथ पर गुजारनी पड़ीं। असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करते हुए उन्होंने कभी हीरो के कपड़े संभाले तो कभी सेट पर छोटे-मोटे काम किए। लेकिन इन हालातों ने उनका हौसला नहीं तोड़ा।
सम्बंधित ख़बरें
इंडियन आइडल 16 का खिताब ज्योतिर्मयी नायक के नाम, कैंसर मरीजों को म्यूजिक थेरेपी देने वाली सिंगर ने रचा इतिहास
लंकेश के किरदार में ढलने के लिए यश ने किया खास अभ्यास, बोले- शिव के गीत सुनकर ही मिलता था सही भाव
‘जन नायकन’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा बरकरार, ओपनिंग वीकेंड में 100 करोड़ क्लब में एंट्री, कई फिल्मों को छोड़ा पीछे
सिर्फ लव स्टोरी नहीं, हीलिंग और भरोसे की मिसाल बनी ‘डियर कॉमरेड’, 7 साल बाद भी याद किए जा रहे ये यादगार सीन
जावेद अख्तर की फिल्में
फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें पहला मौका लेखक के रूप में मिला और जल्द ही सलीम खान के साथ उनकी जोड़ी बनी, जिसे आज ‘सलीम-जावेद’ के नाम से जाना जाता है। इस जोड़ी ने ‘जंजीर’, ‘दीवार’, ‘शोले’, ‘यादों की बारात’ और ‘डॉन’ जैसी ऐतिहासिक फिल्में दीं, जिन्होंने हिंदी सिनेमा की दिशा बदल दी। जावेद अख्तर के संवाद और गीतों में आम आदमी की आवाज साफ सुनाई देती है।
ये भी पढ़ें- ‘मर्दानी 3’ में फिर गूंजेगा साहस का नारा, रानी मुखर्जी ने पुलिसकर्मियों को किया सलाम
जावेद अख्तर ने जीते आठ फिल्मफेयर अवॉर्ड
जावेद अख्तर ने अपने करियर में आठ फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते। साहित्य और कला के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें 1999 में पद्मश्री और 2007 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। फिल्मों के अलावा उनकी कविताएं और किताबें भी लोगों को सोचने पर मजबूर करती हैं। आज जावेद अख्तर की कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखता है।
