जब फिल्मों में काम करना था ‘वर्जित’, तब दुर्गा खोटे ने तोड़ी हर बंदिश, बनीं पहली फ्रीलांस एक्ट्रेस
Durga Khote Struggle Story: दुर्गा खोटे ने उस दौर में फिल्मों में कदम रखा जब महिलाओं के लिए यह वर्जित माना जाता था। पति के निधन के बाद उन्होंने पहली फ्रीलांस अभिनेत्री बनने का साहस किया।
- Written By: सोनाली झा
दुर्गा खोटे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Durga Khote Birth Anniversary Special Story: हिंदी और मराठी सिनेमा के शुरुआती दौर में फिल्मों में काम करना महिलाओं के लिए आसान नहीं था। उस समय समाज में फिल्मों को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था और कलाकारों को किसी एक स्टूडियो या प्रोडक्शन हाउस के साथ लंबे कॉन्ट्रैक्ट में बंधकर काम करना पड़ता था। ऐसे माहौल में किसी महिला का स्वतंत्र होकर अपने फैसले खुद लेना एक बड़ा जोखिम माना जाता था। लेकिन दुर्गा खोटे ने इन सभी सीमाओं को तोड़ते हुए भारतीय सिनेमा की पहली फ्रीलांस अभिनेत्री बनने का साहसिक कदम उठाया।
दुर्गा खोटे का जन्म 14 जनवरी 1905 को मुंबई में हुआ था। वह अपने समय से काफी आगे सोचने वाली महिला थीं। उस दौर में जब लड़कियों की पढ़ाई आम नहीं थी, दुर्गा ने ग्रेजुएशन तक की शिक्षा हासिल की। उनकी यह शिक्षा आगे चलकर उनके आत्मनिर्भर बनने में अहम साबित हुई। महज 17 साल की उम्र में उनकी शादी विश्वनाथ खोटे से हुई और बाद में उनके दो बेटे हुए। हालांकि, 26 साल की उम्र में पति के निधन के बाद दुर्गा के जीवन में बड़ा संघर्ष आया। दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी और आर्थिक परेशानियों ने उन्हें मजबूत बनने पर मजबूर कर दिया।
दुर्गा खोटे ने फिल्म इंडस्ट्री में रखा कदम
परिवार को संभालने के लिए दुर्गा ने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। इसी दौरान उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला। अपनी बहन के जरिए उन्हें फिल्म ‘फरेबी जाल’ में छोटी भूमिका मिली। समाज के विरोध और आलोचनाओं के बावजूद दुर्गा ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। जल्द ही उनकी प्रतिभा को पहचान मिली और उन्हें लगातार काम मिलने लगा।
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पहली फ्रीलांस एक्ट्रेस बनीं दुर्गा खोटे
फिल्मों में आने के बाद दुर्गा खोटे ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया। उन्होंने किसी एक स्टूडियो के साथ बंधने से इनकार कर दिया और अलग-अलग प्रोडक्शन हाउस के लिए काम करना शुरू किया। प्रभात फिल्म कंपनी से जुड़ने के बावजूद उन्होंने न्यू थिएटर्स, ईस्ट इंडिया फिल्म कंपनी और प्रकाश पिक्चर्स जैसी कई कंपनियों के साथ काम किया। इसी वजह से उन्हें हिंदी सिनेमा की पहली फ्रीलांस महिला एक्ट्रेस माना जाता है। उनके इस फैसले ने इंडस्ट्री में महिलाओं के लिए नए रास्ते खोले।
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दुर्गा खोटे का करियर
करीब 50 साल के करियर में दुर्गा खोटे ने हिंदी और मराठी की 200 से अधिक फिल्मों में काम किया। ‘मुगल-ए-आजम’ में जोधा बाई, ‘मिर्जा गालिब’, ‘भरत मिलाप’ और ‘बॉबी’ में दादी जैसे किरदार आज भी याद किए जाते हैं। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने 1937 में फिल्म ‘साथी’ को प्रोड्यूस और डायरेक्ट भी किया, जो उस दौर में बेहद दुर्लभ उपलब्धि थी।
