शंकर महादेवन (फोटो-सोशल मीडिया)
Shankar Mahadevan Birthday Special Story: बॉलीवुड के दिग्गज सिंगर शंकर महादेवन का जन्म 3 मार्च 1967 को मुंबई के चेंबूर में हुआ था। शंकर महादेवन आज अपना 59वां जन्मदिन मना रहे हैं। ‘मां’ जैसी भावुक रचना हो या ‘कजरारे-कजरारे’ जैसा जोशीला गीत हर अंदाज में शंकर महादेवन का अलग ताप महसूस होता है।
शंकर महादेवन ने 1998 में अपनी पहली एल्बम ‘ब्रैथलेस’ से धमाकेदार एंट्री की। इस गाने में बिना रुके गाने का अनूठा प्रयोग श्रोताओं के लिए चौंकाने वाला था। देखते ही देखते यह गीत शंकर महादेवन की पहचान बन गया और वे संगीत की दुनिया में अलग मुकाम पर पहुंच गए। शास्त्रीय संगीत के कई दिग्गजों ने शंकर महादेवन के हुनर की खुलकर तारीफ की। उस्ताद जाकिर हुसैन, उस्ताद अमजद अली खान और पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जैसे कलाकार शंकर महादेवन के गायन के मुरीद रहे हैं। महान गायिका किशोरी अमोनकर ने भी शंकर महादेवन को सराहा और ‘तारे ज़मीन पर’ का ‘मां’ गाने की इच्छा जताई थी।
हालांकि शंकर महादेवन ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन उनका दिल हमेशा संगीत में ही रमा रहा। बचपन से ही सुरों के प्रति लगाव ने शंकर महादेवन को मंच तक पहुंचाया। शंकर महादेवन ने शास्त्रीय संगीत की गहरी साधना की, जिसका असर उनके हर गीत में झलकता है। सफलता के बाद शंकर महादेवन ने एहसान नूरानी और लॉय मेंडोंसा के साथ मिलकर ‘Shankar-Ehsaan-Loy’ की स्थापना की। इस तिकड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार गाने दिए। 2011 क्रिकेट विश्व कप का थीम सॉन्ग भी इसी टीम ने तैयार किया, जिसने देश में जोश भर दिया।
शंकर महादेवन चार बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुके हैं। इसके अलावा शंकर महादेवन कई बार बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर और बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर के सम्मान से नवाजे जा चुके हैं। ‘मां’ की भावनात्मक गहराई से लेकर ‘कजरारे-कजरारे’ की ऊर्जा तक, शंकर महादेवन ने हर शैली में खुद को साबित किया है। आज भी शंकर महादेवन का संगीत नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है और यह साबित करता है कि सच्ची लगन और साधना से हर सुर को अमर बनाया जा सकता है।