जमशेदजी टाटा की 187वीं जयंती (सोर्स-डिज़ाइन)
Jamsetji Tata Visionary Father Of Indian Industry: आज हम भारतीय उद्योग जगत के पितामह जमशेदजी नुसरवानजी टाटा की 187वीं जयंती मना रहे हैं, जिन्होंने आधुनिक भारत का सपना देखा था। उनका जन्म 3 मार्च 1839 को गुजरात के नवसारी में हुआ था और उन्होंने अपनी दूरदर्शिता से देश को औद्योगिक आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर किया। जमशेदजी का मानना था कि केवल व्यापार करना ही काफी नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देना सबसे जरूरी कार्य है।
जमशेदजी ने मात्र 14 वर्ष की आयु में बॉम्बे आकर एल्फिंस्टन कॉलेज से अपनी शिक्षा पूरी की और फिर अपने पिता के व्यापार में शामिल हो गए। उन्होंने 1868 में 21,000 रुपये की पूंजी के साथ अपनी खुद की ट्रेडिंग कंपनी शुरू की और जल्द ही कपड़ा उद्योग में बड़ा कदम रखा। उन्होंने चिंचपोकली में एक पुरानी मिल खरीदी और उसे ‘अलेक्जेंड्रा मिल’ में बदलकर अपनी व्यापारिक कुशलता का परिचय देते हुए भारी मुनाफा कमाया।
जमशेदजी के जीवन के चार मुख्य लक्ष्य थे: एक लोहा और इस्पात कंपनी, एक विश्व स्तरीय शिक्षण संस्थान, एक अद्वितीय होटल और एक जलविद्युत संयंत्र। हालांकि वे अपने जीवनकाल में केवल ताज महल होटल का उद्घाटन ही देख पाए, जो 3 दिसंबर 1903 को मुंबई के कोलाबा तट पर शुरू हुआ था। उस समय ताज होटल भारत का एकमात्र ऐसा होटल था जिसमें बिजली की व्यवस्था थी और यह भारतीय गर्व का एक प्रतीक बना।
जमशेदजी टाटा केवल एक व्यवसायी नहीं थे, बल्कि वे मजदूरों के कल्याण और सामाजिक सुधारों के प्रति भी बेहद जागरूक और संवेदनशील इंसान थे। उन्होंने आधुनिक श्रम कानूनों से बहुत पहले ही मजदूरों के लिए कम काम के घंटे और भविष्य निधि जैसी सुविधाओं की पुरजोर वकालत की थी। उनके सपनों के शहर जमशेदपुर की परिकल्पना में स्कूल, अस्पताल और हरे-भरे मैदानों को विशेष स्थान दिया गया था जो आज भी मिसाल है।
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शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है, उन्होंने भारतीय छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा दिलाने के लिए जेएन टाटा एंडोमेंट की विशेष स्थापना की। भारतीय विज्ञान संस्थान यानी IISC की स्थापना के लिए उन्होंने 30 लाख रुपये का दान दिया ताकि देश में वैज्ञानिक शोध और प्रगति को बढ़ावा मिले। जमशेदजी 1904 में दुनिया से चले गए, लेकिन उनके द्वारा बोए गए बीज आज टाटा ग्रुप और आधुनिक भारत के रूप में फल-फूल रहे हैं।