90s Actress Madhoo: ‘9 साल में इतना काम किया’…अभिनेत्री मधु ने सुनाई अपने करियर की अनकही कहानी
Actress Madhoo Life Story: दिग्गज एक्ट्रेस मधु ने खुलासा किया है कि 90 के दशक में अभिनेत्रियों का करियर लंबा क्यों होता था। उन्होंने आज के दौर की तुलना में पहले मिलने वाले सुधार के मौकों को इसकी असल
- Written By: यति सिंह
अभिनेत्री मधु (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Actress Madhoo Career Journey: आज बड़े पर्दे पर आने वाली हर नई एक्ट्रेस पहली ही फिल्म से बिल्कुल परफेक्ट दिखने की कोशिश करती है। लेकिन क्या यह परफेक्शन उनके लंबे करियर की गारंटी है? फिल्म ‘रोजा’ और ‘फूल और कांटे’ जैसी यादगार फिल्मों से लाखों दिलों में अपनी खास पहचान बनाने वाली दिग्गज अभिनेत्री मधु ने इस मुद्दे पर एक बेहद दिलचस्प और आंखें खोलने वाली बात कही है।
अभिनेत्री मधु का मानना है कि आज के दौर में नई अभिनेत्रियों के पास अपनी गलतियों से सीखने का समय ही नहीं बचा है, जबकि उनके समय में ऐसा नहीं था। उन्होंने बताया कि आजकल की नई अभिनेत्रियां अपनी पहली ही फिल्म से स्क्रीन पर बेहद खूबसूरत, सलीके से तैयार और एक्टिंग में परफेक्ट नजर आती हैं।
क्या आज की अभिनेत्रियां पहली ही फिल्म में ज्यादा परफेक्ट हैं
अभिनेत्री मधु ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान पुराने और नए दौर के बॉलीवुड के बीच के बड़े अंतर को शेयर करते हुए कहा कि नई अभिनेत्रियां अपनी पहली ही फिल्म से स्क्रीन पर बेहद खूबसूरत, सलीके से तैयार और एक्टिंग में परफेक्ट नजर आती हैं। यह देखने में तो बहुत अच्छा लगता है, लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है।
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इस शुरुआती परफेक्शन की वजह से दर्शकों और फिल्म मेकर्स की उम्मीदें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं। ऐसे में अगर एक्ट्रेस से जरा सी भी चूक होती है, तो उसे दूसरा मौका नहीं मिलता।
कैसे बच जाता था फ्लॉप अभिनेत्रियों का करियर
90 के दशक का जिक्र करते हुए एक्ट्रेस मधु ने बताया कि उस दौर में अभिनेत्रियों को खुद में सुधार करने के लिए भरपूर समय और मौके मिलते थे। अगर कोई अभिनेत्री अपनी पहली फिल्म में दर्शकों को बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं भी कर पाती थी, तो उसे इंडस्ट्री से बाहर नहीं का रास्ता नहीं दिखाया जाता था।
मधु ने आगे कहा कि ‘उसे दूसरी या तीसरी फिल्म में अपनी कमियों को सुधारने का अवसर मिलता था। दर्शकों के साथ धीरे-धीरे एक जुड़ाव बनता था, जो उनके करियर को लंबा और टिकाऊ बनाने में मदद करता था।’
आज के सिनेमा के माहौल पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि अब स्थितियां बिल्कुल बदल चुकी हैं। नई अभिनेत्रियों के पास सीखने या प्रयोग करने की कोई गुंजाइश नहीं होती। या तो वे अपनी पहली ही फिल्म से बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हों, या फिर बहुत जल्द उनकी जगह कोई नया चेहरा ले लेता है।
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मधु ने फिल्मी सफर से क्या बड़ा सबक सीखा
अभिनेत्री मधु ने अपने खुद के सफर को याद करते हुए कहा कि जब उन्होंने 1991 में अजय देवगन के साथ फिल्म ‘फूल और कांटे’ से कदम रखा था, तब वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री नहीं थीं। उनके लुक, बालों के स्टाइल और मेकअप में कई कमियां थीं।
बता दें कि अभिनेत्री मधु ने साल 1994 में आई अक्षय कुमार की फिल्म ऐलान में बतौर मुख्य अभिनेत्री के रूप में बड़े पर्दे पर काम काम किया था। इसके बावजूद दर्शकों ने उनके सहज अंदाज को पसंद किया और उनसे जुड़ाव महसूस किया। उनके 9 साल के सक्रिय फिल्मी करियर में आई हर नई फिल्म उनके लिए सीखने का एक नया जरिया बनी। मधु को लगातार काम करते हुए खुद को निखारा और फिर अपनी मर्जी से एक्टिंग की दुनिया को अलविदा कहा था।
