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बंगाल चुनाव में वोटर लिस्ट वाला बड़ा खेल! नई लिस्ट ने बढ़ाई ममता बनर्जी की मुसीबत, SIR बदल देगा चुनावी समीकरण?
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव में नई वोटर लिस्ट (SIR) सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है, जिसने ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी है और करीब 50 सीटों पर चुनावी समीकरण बदल दिए हैं।

ममता बनर्जी, फोटो- सोशल मीडिया
West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार चुनावी आंकड़ों और वोटर लिस्ट में हुए बड़े फेरबदल की वजह से गर्मी बढ़ी हुई है। राज्य में चुनावी बिगुल बज चुका है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पारंपरिक सीटों, नंदीग्राम और भवानीपुर से ताल ठोंक दी है।
इस बार का बंगाल चुनाव सड़क की लड़ाई से ज्यादा कागजों और लिस्ट्स की लड़ाई बनता जा रहा है। 8 अप्रैल की सुबह जब ममता बनर्जी अपने घर से नामांकन के लिए निकलीं, तो उनके समर्थकों का उत्साह तो देखते ही बनता था, लेकिन मुख्यमंत्री के बयानों ने राज्य की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने सीधे तौर पर निर्वाचन आयोग की नई वोटर लिस्ट पर सवाल उठाए हैं।
नई वोटर लिस्ट ने बढ़ाई ममता की मुसीबत
मुख्यमंत्री का दावा है कि राज्य की नई वोटर लिस्ट से करीब 90.8 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 11.9 प्रतिशत है। अकेले भवानीपुर सीट से ही 51 हजार वोट कम होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जिसे ममता बनर्जी ने अदालत में चुनौती देने की बात कही है। जानकारों का मानना है कि इस ‘वोटर लिस्ट’ विवाद ने तृणमूल कांग्रेस के लिए करीब 50 सीटों पर चुनौती को बेहद कड़ा कर दिया है।
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भाजपा इसे एक सामान्य प्रक्रिया बता रही है। राज्य भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य का कहना है कि जो लोग मर गए या कहीं और चले गए, उनके नाम हटाना नियम के मुताबिक है और इसमें किसी खास समुदाय को निशाना नहीं बनाया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस विवाद के बाद मुस्लिम मतदाता शायद और भी मजबूती के साथ ममता बनर्जी के पक्ष में लामबंद हो सकते हैं।
शहरी इलाकों में नाराजगी तो गांवों में चला योजनाओं का जादू
बंगाल का चुनावी मिजाज इस बार बटा हुआ नजर आ रहा है। एक तरफ जहां शहरी क्षेत्रों में ममता सरकार के खिलाफ ‘एंटी इनकंबेंसी’ यानी सत्ता विरोधी लहर साफ दिखाई दे रही है, वहीं ग्रामीण इलाकों में कहानी बिल्कुल उलट है। गांव के लोग आज भी सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं से मजबूती से जुड़े हुए महसूस करते हैं। ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजना, जिसके तहत राज्य की 2.21 करोड़ महिलाओं को सीधे आर्थिक मदद दी जा रही है, ग्रामीण बंगाल में एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो रही है।
इसके अलावा ‘दुआरे सरकार’ (दरवाजे पर सरकार) जैसे मॉडल ने भी लोगों के बीच अपनी पैठ बनाई है। आंकड़ों की बात करें तो 2021 में भी तृणमूल ने मुस्लिम बहुल और ग्रामीण सीटों पर जबरदस्त जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा का ग्राफ भी 2016 के 10 प्रतिशत से बढ़कर 2021 में 38 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
भाजपा की फौज तैयार, शाह का पलटवार
चुनाव के इस महासमर में भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे एक बार फिर केंद्र में हैं। गृहमंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी को जनता की नहीं, बल्कि अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाने की चिंता है। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी भाजपा पर हमला करते हुए कहती हैं कि सांप पर तो भरोसा किया जा सकता है, लेकिन भाजपा पर नहीं।
यह भी पढ़ें: बंगाल में बदलाव की मोदी गारंटी, सिंडिकेट राज के अंत और महिलाओं को बड़ी सौगात, जानें भाजपा के सभी बड़े वादे?
भाजपा का दावा है कि उन्होंने राज्य के 85 हजार बूथों में से 65 हजार पर अपने कार्यकर्ताओं की फौज तैयार कर ली है। उनका मानना है कि अगर इस बार चुनाव भयमुक्त माहौल में हुए, तो नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं, क्योंकि उनके अनुसार पिछले कुछ सालों में उनके कई कार्यकर्ता राजनीतिक हिंसा का शिकार हुए हैं।
West bengal election 2026 voter list sir issue mamata vs bjp
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