तमिलनाडु चुनाव में नामंकन में फंसा पेच, फोटो- सोशल मीडिया
Tamil Nadu Election Nomination Date: तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनावी महासंग्राम के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और विपक्ष के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने अपने-अपने तरकश से तीर निकाल लिए हैं। उम्मीदवारों के नाम फाइनल हो चुके हैं और गठबंधन की तस्वीर भी साफ है।
लेकिन इस समय राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक अजीब सी बेचैनी है। यह बेचैनी किसी चुनावी हार-जीत के डर से नहीं, बल्कि नामांकन की उस पेचीदा प्रक्रिया से है जिसने प्रत्याशियों की रातों की नींद उड़ा दी है। सरकारी कैलेंडर की कुछ तारीखों ने इस बार दिग्गजों के सामने ऐसी चुनौती खड़ी कर दी है, जिसे पार करना उनके लिए सबसे बड़ी पहली परीक्षा साबित होने वाला है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आधिकारिक प्रक्रिया सोमवार, 30 मार्च से शुरू होने जा रही है। कहने को तो चुनाव अधिकारियों ने इसके लिए 6 अप्रैल तक का समय दिया है, जो कागज पर 8 दिन नजर आता है, लेकिन असलियत इससे कोसों दूर है। इन 8 दिनों के भीतर छुट्टियों की ऐसी झड़ी लगी है कि उम्मीदवारों को अपने दस्तावेज जमा करने के लिए वास्तव में केवल 4 कार्य दिवस ही मिलेंगे।
दरअसल, 31 मार्च को महावीर जयंती, 1 अप्रैल को बैंक क्लोजिंग, 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे और 5 अप्रैल को रविवार होने के कारण नामांकन केंद्र बंद रहेंगे। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अंतिम दिन यानी 6 अप्रैल को भारी भीड़ उमड़ सकती है, जिससे किसी भी तकनीकी या कागजी गलती को सुधारने का मौका नहीं मिलेगा।
दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके ने अपनी चुनावी मशीनरी को पूरी रफ्तार से सक्रिय कर दिया है। पार्टी अब तक कुल 167 उम्मीदवारों के नामों का एलान कर चुकी है। पलानीस्वामी की रणनीति इस बार बेहद साफ है- अनुभव और स्थानीय पकड़ पर भरोसा। उनकी पहली सूची में ही 21 पूर्व मंत्रियों को जगह दी गई थी, जबकि दूसरी सूची में 46 मौजूदा विधायकों को फिर से मौका मिला है।
खुद ईपीएस अपनी पारंपरिक सीट एडप्पादी से ताल ठोक रहे हैं। पार्टी ने महिला सशक्तिकरण का संदेश देते हुए अब तक 17 महिला उम्मीदवारों को भी टिकट दिया है। अन्नाद्रमुक की कोशिश है कि नामांकन की शुरुआती तारीखों में ही अपने मुख्य दिग्गजों के पर्चे दाखिल करवा दिए जाएं ताकि छुट्टियों के जाल में फंसने का जोखिम न रहे।
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सत्तारूढ़ DMK गठबंधन में इस बार सबसे बड़ा उलटफेर पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम को लेकर हुआ है। कभी अन्नाद्रमुक के कद्दावर नेता रहे पनीरसेल्वम अब एम.के. स्टालिन के पाले में हैं और बोडिनायकन्नूर से चुनाव लड़ेंगे। स्टालिन ने खुद 164 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जबकि कांग्रेस को 28 और अन्य सहयोगियों जैसे डीएमडीके को 10 सीटें दी गई हैं।
मुख्यमंत्री अपने ‘द्रविड़ मॉडल’ और मजबूत सामाजिक समीकरणों के भरोसे सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, उनके सामने भी बड़ी चुनौती यही है कि उनके गठबंधन के सभी 234 उम्मीदवार इन सीमित 4 दिनों के भीतर बिना किसी चूक के अपना नामांकन पूरा कर लें।