

AIADMK Final Candidate List: तमिलनाडु में सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता बहुत पेचीदा दिख रहा है। इस बार का मुकाबला किसी फिल्मी क्लाइमेक्स से कम नहीं नजर आ रहा। एक तरफ मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन हैं, जो अपनी सत्ता बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं, तो दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पडी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) हैं, जिन्होंने आज अपनी 'फाइनल आर्मी' मैदान में उतार दी है।
पलानीस्वामी ने इस बार कोई जोखिम लेने के बजाय अपने सबसे भरोसेमंद और अनुभवी चेहरों पर दांव लगाया है। शुक्रवार को जारी हुई इस फाइनल सूची में चेन्नई समेत 17 विधानसभा क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों के नाम तय किए गए हैं।
इस लिस्ट में सबसे चर्चित नाम श्रीमती पी. वलारमथि का है, जो 'थाउजेंड लाइट्स' सीट से चुनाव लड़ेंगी। वलारमथि न केवल पार्टी की महिला विंग की सचिव हैं, बल्कि पूर्व मंत्री भी रह चुकी हैं। इसी तरह अन्नानगर सीट से पूर्व मंत्री एस. गोकुला इंदिरा को उतारा गया है, जिन्हें पार्टी का कद्दावर चेहरा माना जाता है।
ईपीएस की यह रणनीति साफ इशारा करती है कि वे उन सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं जहां पिछले चुनाव में मामूली अंतर से हार-जीत हुई थी। अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारने का मतलब है कि पार्टी संगठन को एकजुट रखकर अपने पारंपरिक वोट बैंक को सहेजने की कोशिश कर रही है।
इस बार का चुनाव सिर्फ उम्मीदवारों के चेहरे पर नहीं, बल्कि गठबंधन की गणित पर भी टिका है। एआईएडीएमके इस बार एनडीए के बैनर तले चुनावी मैदान में है। पलानीस्वामी ने एक मजबूत मोर्चा तैयार किया है जिसमें भाजपा (27 सीटें), पीएमके (18 सीटें) और एएमएमके (11 सीटें) जैसे सहयोगी दल शामिल हैं।
खुद एआईएडीएमके तकरीबन 167 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। गठबंधन की यह ताकत ही तय करेगी कि क्या वे द्रमुक के विजय रथ को रोक पाएंगे। एक आम मतदाता के लिए यह गठबंधन स्थिरता और विकास की नई उम्मीद की तरह देखा जा रहा है। अगर यह गठबंधन अपने वोटों को एक-दूसरे के पक्ष में ट्रांसफर कराने में सफल रहता है, तो स्टालिन की मुश्किलें बढ़ना तय है। लेकिन चुनौती यह भी है कि अगर गठबंधन के भीतर कोई भी दरार आती है, तो इसका सीधा फायदा सत्तारूढ़ द्रमुक को मिल सकता है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान होते ही पूरे राज्य में सरगर्मी बढ़ गई है। राज्य में 23 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में मतदान संपन्न होगा। मतगणना और परिणाम 4 मई 2026 को आएंगे, जो यह तय करेंगे कि अगले पांच साल तक तमिलनाडु की बागडोर किसके हाथ में होगी।
एआईएडीएमके का दावा है कि वे अन्ना दुरई की विचारधारा और अनुभवी चेहरों के दम पर राज्य में 'सुशासन' वापस लाएंगे। दूसरी तरफ, स्टालिन का 'महादांव' और उनकी लोकलुभावन योजनाएं भी कम नहीं हैं। आम आदमी के लिए यह चुनाव बिजली, पानी, रोजगार और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दों पर केंद्रित रहने वाला है।