
वायनाड या रायबरेली? किसे चुनेंगे राहुल गांधी
वायनाड (केरल): साल 2024 के लोकसभा के चुनावों में कुछ चुने हुए लोग ऐसे भी रहे जो पहले से विधानसभा के सदस्य थे और उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत गए। वहीं राहुल गांधी अकेले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने दो स्थानों से चुनाव लड़ा और दोनों सीटों पर ही वह जीत गए। लगातार दूसरी बार राहुल गांधी की जीत सुनिश्चित करने वाली वायनाड लोकसभा सीट में ईसाइयों की तादाद अच्छी-खासी है। यहां से राहुल ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की एनी राजा को 3.64 लाख से अधिक वोटों के अंतर से हराया है।वहीं, यूपी के रायबरेली में उन्होंने 3 लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की है।
लेकिन कांग्रेस के इस दिग्गज नेता के रायबरेली से भी जीत दर्ज करने के बाद अब सवाल खड़ा हो गया है कि वह किस निर्वाचन क्षेत्र को चुनेंगे। हालांकि, राहुल ने कहा है कि अभी उन्होंने यह फैसला नहीं लिया है कि वह लोकसभा में किस सीट का प्रतिनिधित्व करेंगे। राहुल ने बीते मंगलवार को कहा, “मैंने दोनों सीट जीत ली हैं और मैं रायबरेली तथा वायनाड के मतदाताओं को दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं। अब मुझे फैसला करना होगा कि मैं किस सीट को चुनूं। हम चर्चा करेंगे और फिर फैसला करेंगे। दोनों सीटों पर नहीं रह सकता, लेकिन मैंने अभी तक फैसला नहीं किया है।”
देखा जाए तो राहुल गांधी अकेले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने दो स्थानों से चुनाव लड़ा और दोनों सीटों पर वह जीत गए। इन दोनों ही स्थितियों में नियम और संविधान क्या कहता है। दरअसल संविधान के अनुसार राहुल को अपनी एक सीट खाली करनी होगी, क्योंकि नियम के तहत कोई व्यक्ति एक साथ संसद के दोनों सदनों (या राज्य विधानमंडल) या संसद और राज्य विधानमंडल दोनों का सदस्य नहीं हो सकता है या एक सदन में एक से ज़्यादा सीटों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है।
हालंकी दिलचस्प बात यह भी रही कि लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में केरल में मतदान पूरा होने तक यह पुष्टि नहीं हुई थी कि, राहुल गांधी उत्तर प्रदेश से किसी और सीट से भी चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन फिर वे रायबरेली की सीट से भी लड़े। इस तरह राहुल ने अपनी दोनों ही सीटों पर जीत हासिल कर ली है। इसमें रायबरेली की सीट की जीत जितनी अहम है उतनी ही वायनाड की सीट की जीत भी। क्योंकि जहां रायबरेली की सीट कांग्रेस की विरासत है तो वही वायनाड की सीट राहुल के लिए धर्मभूमि है जहां से पिछली बार वो जीतकर लोकसभा पहुंचे थे।
कुछ राजनीतिक जानकारों की मानें तो उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट कांग्रेस के लिए बेहद अहम है इसलिए अटकलें तो यही है कि राहुल रायबरेली को तो नहीं छोड़ेगें। फिर ऐसे में वायनाड का क्या होगा।अगर ऐसा रहा तो वायनाड में उपचुनाव कराए जाएंगें और हो सकता है कि कांग्रेस की सुरक्षित सीट होने के चलते वहां से किसी खास चेहरे को लड़ाया जा सकता है, जैसे कि प्रियंका गांधी।
लेकिन ऐसे में क्या वायनाड की जनता एक बार फिर से हुए चुनाव में कांग्रेस का साथ देगी या फिर कांग्रेस का खेल ही पलट देगी। ये तो खैर आने वाले समय पर निर्भर है। फिलहाल कांग्रेस के लिए राहुल की दोनों सीटों से मिली जीत की खुशी ज्यादा मायने रखती दिख रही है।






