5 दलित… 4 राजपूत और तीन कोइरी, बिहार में NDA का नया पॉवर पैटर्न! यहां देखिए पूरी लिस्ट
Nitish Cabinet: नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में हर वर्ग और जाति के नेताओं को शामिल करके एक मजबूत जातीय संतुलन बनाने की कोशिश की गई है, जिसमें राजपूतों को 4 और दलितों को 5 सीटें मिली हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
नीतीश कैबिनेट (डिजाइन)
Nitish Kumar Takes Oath Know Bihar Cabinet Ministers List: बिहार चुनाव में एनडीए गठबंधन को मिली शानदार जीत के बाद, गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। इस समारोह में नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और उनके साथ 26 अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की। इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी नई कैबिनेट में हर वर्ग और जाति के प्रमुख नेताओं को शामिल करने पर खास ध्यान दिया है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि सरकार जातीय समीकरणों को साधने की रणनीति पर चल रही है।
जातिगत प्रतिनिधित्व का समीकरण! किसे मिली कितनी जगह?
बिहार की राजनीति में जाति का गणित हमेशा से ही बहुत महत्वपूर्ण रहा है। नई सरकार को स्थिर रखने और जनता से जुड़ाव बनाए रखने के लिए यह आवश्यक था कि मंत्रिमंडल में हर वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व मिले। इस बार की कैबिनेट में यह कोशिश साफ दिखाई देती है।
सबसे अधिक प्रतिनिधित्व दलित समुदाय को दिया गया है, जिन्हें 5 मंत्री पद मिले हैं। इसके बाद, राजपूत समाज से भी 4 चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है, जो इस प्रभावशाली वर्ग को साधने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है। वहीं कुशवाहा (कोइरी) समुदाय से 3 मंत्री बनाए गए हैं। इसके अलावा, भूमिहार, कुर्मी, वैश्य/बनिया, यादव और मल्लाह/निषाद समुदायों को 2-2 मंत्री पद दिए गए हैं।
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दलित-5, राजपूत-4, कुशवाहा (कोइरी) 3, भूमिहार, कुर्मी, वैश्य/बनिया, यादव, मल्लाह/निषाद 2-2, ब्राह्मण, कायस्थ, मुस्लिम और EBC (अन्य अति पिछड़ा) वर्गों से 1-1 मंत्री शामिल किया गया है। यह जातीय संतुलन दर्शाता है कि NDA ने बिहार की विविधता को सम्मान देते हुए एक ऐसी टीम बनाई है जो राज्य के सामाजिक ताने-बाने को दर्शाती है।
प्रमुख चेहरे, कौन किस क्षेत्र से?
इस कैबिनेट में बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी (RV) और HAM जैसी पार्टियों के प्रमुख नेता शामिल हैं। बीजेपी (BJP) ने इस कैबिनेट में कई प्रभावशाली नेताओं को शामिल किया है, जैसे- सम्राट चौधरी (कुशवाहा, मुंगेर) एक प्रमुख कुशवाहा नेता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विजय सिन्हा (भूमिहार, लखीसराय) मजबूत पकड़ वाले भूमिहार चेहरे के तौर पर शामिल हैं। मंगल पांडे (ब्राह्मण, सिवान) ब्राह्मण समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। नितिन नबीन (कायस्थ, पटना) पटना की प्रतिष्ठित बांकीपुर सीट से विधायक हैं और सवर्ण कायस्थ समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं।
जेडीयू (JDU) की तरफ से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (कुर्मी, नालंदा) के अलावा कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं, श्रवण कुमार (कुर्मी, नालंदा) नीतीश कुमार के सबसे पुराने और भरोसेमंद साथियों में से एक हैं। विजय चौधरी (भूमिहार, समस्तीपुर) जेडीयू के अनुभवी भूमिहार नेता हैं। अशोक चौधरी (दलित, पटना) और सुनील कुमार (दलित, गोपालगंज) दलित समुदाय को मजबूत प्रतिनिधित्व देते हैं।
इसके अलावा, एलजेपी (आरवी) से संजय पासवान और संजय सिंह को तथा हम (HAM) पार्टी से संतोष कुमार सुमन (दलित, गया) को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। संतोष सुमन मुसहर जाति से आते हैं और बिहार के सबसे वंचित समूहों में से एक का प्रतिनिधित्व करते हैं। दिलीप कुमार जायसवाल (वैश्य) और जमा खान (मुस्लिम) जैसे अन्य चेहरे भी कैबिनेट की विविधता को मजबूत करते हैं।
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जातिगत संतुलन का महत्व
नीतीश कुमार की यह नई टीम साफ तौर पर यह संदेश देती है कि NDA हर जातीय वर्ग को प्रतिनिधित्व देकर राजनीतिक और सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश में सफल रहा है। हर क्षेत्र और हर जाति के प्रमुख नेताओं को शामिल करना आने वाले समय में सरकार की स्थिरता, जनता के बीच स्वीकार्यता और सुशासन के लिए बहुत अहम साबित होगा। यह जातीय समीकरण साधने की कोशिश बिहार की राजनीति में एक मजबूत और समावेशी सरकार की नींव रखती है।
