Exclusive: हां.. मीनाक्षी नटराजन के केस के बारे में हमें सोर्स ने बताया था, हेमंत खंडेलवाल ने खोले कई राज
Meenakshi Natarajan Nomination Case: एमपी बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने माना कि मीनाक्षी नटराजन के फॉर्म की गलतियों की जानकारी उन्हें गुप्त सोर्स से मिली थी।
- Reported By: शैलेंद्र तिवारी
Hemant Khandelwal Exclusive Interview: मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने ‘नवभारत’ के पॉडकॉस्ट ‘द लीडर्स’ में स्वीकार किया कि उन्हें मीनाक्षी नटराजन के फॉर्म की गलतियों की जानकारी कहीं से मिली थी और उसी के आधार पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पहली बार स्वीकार किया कि राज्यसभा में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के फॉर्म की गलतियों की जानकारी उन्हें कहीं सोर्स से आई थी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें फॉर्म की एक-एक गलती के बारे में बताया गया। इतना ही नहीं, उन्हें केस के बारे में पूरी जानकारी भी मुहैया कराई गई। उन्होंने इतना तक कहा कि तेलंगाना में हमारा तो कोई नहीं था…अब जानकारी किसने दी यह आप खुद समझ लीजिए। हेमंत खंडेलवाल ‘नवभारत’ के पॉडकॉस्ट सीरीज ‘द लीडर्स’ में बात कर रहे थे। उनसे बातचीत के प्रमुख अंश…
सवाल: दस वोट कम होते हुए भी राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट भाजपा ने जीत ली, वो भी बिना लड़े?
हेमंत: यदि मतदान होता तो भी हमारा उम्मीदवार जीतता, इसके लिए हमारी तैयारी पूरी थी। यह कांग्रेस की चूक है, उनके विधायक दूसरे शहर ले जाए जा रहे थे, उसी में 25 से 30 कहीं गए ही नहीं। अब अंतरआत्मा की आवाज पर कितने हमारे प्रत्याशी के पक्ष में वोट करते यह वोटिंग होती तो पता चल जाता।
सवाल: क्या आपको मीनाक्षी नटराजन के नामांकन की कमियों की सूचना कहीं से मिली थी?
हेमंत: हां, यह बात सही है कि हमें मीनाक्षी नटराजन के नामांकन की कमियों की सूचना कहीं से मिली थी। हमें हर बात की जानकारी दी गई, कहां फॉर्म में कमी है, कौैन सा केस है। हमने उनका परीक्षण कराया, हमें तथ्य सही मिले तो नियमों के अनुसार आपत्ति दर्ज की गई। अब तेलंगाना में हमारा तो कोई सोर्स है नहीं। अब जानकारी किसने दी, यह बताना ठीक नहीं है।
सवाल: 25 विधायक गए नहीं तो कितने आपके संपर्क में थे?
हेमंत: 25 अगर गए नहीं तो एक बात साफ है कि वह कांग्रेस के वर्तमान उम्मीदवार से नाराज थे। अब कितने वोट भाजपा को देते, यह तो वोटिंग के वक्त ही पता चलता। लेकिन यह तय है कि भाजपा को बड़ी संख्या में वोट मिलते।
सवाल: आपको कार्यकर्ताओं या नेताओं को बुलाकर समझाना पड़ रहा है, ऐसी परिस्थितियां क्यों बनती हैं?
हेमंत: कोई भी परिवार हो या संगठन, अनुशासनहीनता कई बार परिस्थितियों के कारण और कई बार मानवीय स्वभाव के कारण हो जाती है। एक समय था जब हमारे पास मंडल स्तर पर एक-दो कार्यकर्ता होते थे, लेकिन आज एक-एक बूथ पर 10-20 कार्यकर्ता हैं। जब लाखों कार्यकर्ता हों तो कुछ लोगों से गलती होना स्वाभाविक है।
सवाल: क्या कभी ऐसी स्थिति बनी कि किसी प्रभावशाली या सामाजिक रूप से मजबूत व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने में राजनीतिक या सामाजिक दबाव महसूस हुआ हो?
हेमंत: चाहे कोई व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली या ताकतवर क्यों न हो, यदि बात पार्टी के अनुशासन और विचारधारा की आती है, तो न मैं और न ही हमारा केंद्रीय नेतृत्व किसी प्रकार का समझौता करता है। व्यक्ति पर संज्ञान लेते हैं, समझाइश देते हैं और जरूरत हुई तो एक्शन भी लेते हैं।
सवाल: राजनीति में “रौला”, काफिला और शक्ति प्रदर्शन कितना जरूरी है?
हेमंत: यह अलग-अलग लोगों के विचार हो सकते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि उनके व्यक्तित्व और आभामंडल से लोग प्रभावित होंगे, जबकि कुछ लोग मानते हैं कि उनके विचार और कार्यशैली से ही उनकी पहचान बननी चाहिए। मेरा मानना है कि व्यक्ति का आचरण और काम ही सबसे अधिक प्रभाव छोड़ते हैं।
सवाल: क्या संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है, संगठन सत्ता के पीछे है?
हेमंत: प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मेरी जिम्मेदारी है कि सरकार और संगठन के बीच समन्वय बना रहे। अधिकांश स्थानों पर यह सफलतापूर्वक चलता है, लेकिन कुछ जगहों पर मतभेद या दूरी हो सकती है। जहां भी ऐसी जानकारी मिलती है, हम उसे दूर करने का प्रयास करते हैं। मैं समझता हूं कि भाजपा में संगठन या सत्ता के आगे और पीछे रहने का सवाल नहीं है, बल्कि जरूरत है कि साथ चलते रहें। न एक दूसरे में समा जाएं और न ही एक दूसरे से दूर हो जाएं।
सवाल: संगठन क्या सरकार के मंत्रियों के काम पर भी नजर रखता है और फीडबैक देता है?
हेमंत: संगठन हर काम पर पैनी नजर रखता है। अगर कहीं मंत्री, विधायक, जिलाध्यक्ष या कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी होती है तो वह बात संगठन के संज्ञान में आती है और उस पर काम किया जाता है। जरूरत होने पर जरूरी मंचों पर बात भी होती है।
सवाल: सरकारी लापरवाही के मामलों में नैतिक जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होनी चाहिए, अफसरों से आगे मंत्रियों तक जानी चाहिए?
हेमंत: कोई भी ऐसी घटना बहुत दुखद होती है। चाहे गलती किसी स्तर पर हुई हो, जिम्मेदारी सामूहिक होती है। ऐसी घटनाएं न हों इसका जिम्मा सरकार का है। संगठन की भूमिका है कि घटना को रोकने में कैसे मदद करें। कुल मिलाकर चूक किसी की भी हो, लेकिन जिम्मेदारी सामूहिक ही तय होनी चाहिए। जिम्मेदारी हर किसी की है।
रेपिड फायर राउंड
सवाल: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में आपकी सबसे बड़ी ताकत?
हेमंत: मेरे कार्यकर्ता।
सवाल: और सबसे बड़ी कमजोरी?
हेमंत: अगर कार्यकर्ताओं की चीजों को पूरा नहीं कर पांऊ।
सवाल: सबसे अच्छा काम करने वाला मध्य प्रदेश सरकार का मंत्री?
हेमंत: मेरे सभी मंत्री।
सवाल: यदि एक नाम लेना हो?
हेमंत: शायद मैं किसी एक का नाम नहीं ले पाऊंगा।
सवाल: आपके अध्यक्षीय कार्यकाल को किस रूप में कार्यकर्ता याद रखें?
हेमंत: कार्यकर्ता मुझे एक कार्यकर्ता के रूप में ही याद रखें।
Hemant Khandelwal Exclusive Interview: मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने ‘नवभारत’ के पॉडकॉस्ट ‘द लीडर्स’ में स्वीकार किया कि उन्हें मीनाक्षी नटराजन के फॉर्म की गलतियों की जानकारी कहीं से मिली थी और उसी के आधार पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पहली बार स्वीकार किया कि राज्यसभा में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के फॉर्म की गलतियों की जानकारी उन्हें कहीं सोर्स से आई थी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें फॉर्म की एक-एक गलती के बारे में बताया गया। इतना ही नहीं, उन्हें केस के बारे में पूरी जानकारी भी मुहैया कराई गई। उन्होंने इतना तक कहा कि तेलंगाना में हमारा तो कोई नहीं था…अब जानकारी किसने दी यह आप खुद समझ लीजिए। हेमंत खंडेलवाल ‘नवभारत’ के पॉडकॉस्ट सीरीज ‘द लीडर्स’ में बात कर रहे थे। उनसे बातचीत के प्रमुख अंश…
सवाल: दस वोट कम होते हुए भी राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट भाजपा ने जीत ली, वो भी बिना लड़े?
हेमंत: यदि मतदान होता तो भी हमारा उम्मीदवार जीतता, इसके लिए हमारी तैयारी पूरी थी। यह कांग्रेस की चूक है, उनके विधायक दूसरे शहर ले जाए जा रहे थे, उसी में 25 से 30 कहीं गए ही नहीं। अब अंतरआत्मा की आवाज पर कितने हमारे प्रत्याशी के पक्ष में वोट करते यह वोटिंग होती तो पता चल जाता।
सवाल: क्या आपको मीनाक्षी नटराजन के नामांकन की कमियों की सूचना कहीं से मिली थी?
हेमंत: हां, यह बात सही है कि हमें मीनाक्षी नटराजन के नामांकन की कमियों की सूचना कहीं से मिली थी। हमें हर बात की जानकारी दी गई, कहां फॉर्म में कमी है, कौैन सा केस है। हमने उनका परीक्षण कराया, हमें तथ्य सही मिले तो नियमों के अनुसार आपत्ति दर्ज की गई। अब तेलंगाना में हमारा तो कोई सोर्स है नहीं। अब जानकारी किसने दी, यह बताना ठीक नहीं है।
सवाल: 25 विधायक गए नहीं तो कितने आपके संपर्क में थे?
हेमंत: 25 अगर गए नहीं तो एक बात साफ है कि वह कांग्रेस के वर्तमान उम्मीदवार से नाराज थे। अब कितने वोट भाजपा को देते, यह तो वोटिंग के वक्त ही पता चलता। लेकिन यह तय है कि भाजपा को बड़ी संख्या में वोट मिलते।
सवाल: आपको कार्यकर्ताओं या नेताओं को बुलाकर समझाना पड़ रहा है, ऐसी परिस्थितियां क्यों बनती हैं?
हेमंत: कोई भी परिवार हो या संगठन, अनुशासनहीनता कई बार परिस्थितियों के कारण और कई बार मानवीय स्वभाव के कारण हो जाती है। एक समय था जब हमारे पास मंडल स्तर पर एक-दो कार्यकर्ता होते थे, लेकिन आज एक-एक बूथ पर 10-20 कार्यकर्ता हैं। जब लाखों कार्यकर्ता हों तो कुछ लोगों से गलती होना स्वाभाविक है।
सवाल: क्या कभी ऐसी स्थिति बनी कि किसी प्रभावशाली या सामाजिक रूप से मजबूत व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने में राजनीतिक या सामाजिक दबाव महसूस हुआ हो?
हेमंत: चाहे कोई व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली या ताकतवर क्यों न हो, यदि बात पार्टी के अनुशासन और विचारधारा की आती है, तो न मैं और न ही हमारा केंद्रीय नेतृत्व किसी प्रकार का समझौता करता है। व्यक्ति पर संज्ञान लेते हैं, समझाइश देते हैं और जरूरत हुई तो एक्शन भी लेते हैं।
सवाल: राजनीति में “रौला”, काफिला और शक्ति प्रदर्शन कितना जरूरी है?
हेमंत: यह अलग-अलग लोगों के विचार हो सकते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि उनके व्यक्तित्व और आभामंडल से लोग प्रभावित होंगे, जबकि कुछ लोग मानते हैं कि उनके विचार और कार्यशैली से ही उनकी पहचान बननी चाहिए। मेरा मानना है कि व्यक्ति का आचरण और काम ही सबसे अधिक प्रभाव छोड़ते हैं।
सवाल: क्या संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है, संगठन सत्ता के पीछे है?
हेमंत: प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मेरी जिम्मेदारी है कि सरकार और संगठन के बीच समन्वय बना रहे। अधिकांश स्थानों पर यह सफलतापूर्वक चलता है, लेकिन कुछ जगहों पर मतभेद या दूरी हो सकती है। जहां भी ऐसी जानकारी मिलती है, हम उसे दूर करने का प्रयास करते हैं। मैं समझता हूं कि भाजपा में संगठन या सत्ता के आगे और पीछे रहने का सवाल नहीं है, बल्कि जरूरत है कि साथ चलते रहें। न एक दूसरे में समा जाएं और न ही एक दूसरे से दूर हो जाएं।
सवाल: संगठन क्या सरकार के मंत्रियों के काम पर भी नजर रखता है और फीडबैक देता है?
हेमंत: संगठन हर काम पर पैनी नजर रखता है। अगर कहीं मंत्री, विधायक, जिलाध्यक्ष या कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी होती है तो वह बात संगठन के संज्ञान में आती है और उस पर काम किया जाता है। जरूरत होने पर जरूरी मंचों पर बात भी होती है।
सवाल: सरकारी लापरवाही के मामलों में नैतिक जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होनी चाहिए, अफसरों से आगे मंत्रियों तक जानी चाहिए?
हेमंत: कोई भी ऐसी घटना बहुत दुखद होती है। चाहे गलती किसी स्तर पर हुई हो, जिम्मेदारी सामूहिक होती है। ऐसी घटनाएं न हों इसका जिम्मा सरकार का है। संगठन की भूमिका है कि घटना को रोकने में कैसे मदद करें। कुल मिलाकर चूक किसी की भी हो, लेकिन जिम्मेदारी सामूहिक ही तय होनी चाहिए। जिम्मेदारी हर किसी की है।
रेपिड फायर राउंड
सवाल: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में आपकी सबसे बड़ी ताकत?
हेमंत: मेरे कार्यकर्ता।
सवाल: और सबसे बड़ी कमजोरी?
हेमंत: अगर कार्यकर्ताओं की चीजों को पूरा नहीं कर पांऊ।
सवाल: सबसे अच्छा काम करने वाला मध्य प्रदेश सरकार का मंत्री?
हेमंत: मेरे सभी मंत्री।
सवाल: यदि एक नाम लेना हो?
हेमंत: शायद मैं किसी एक का नाम नहीं ले पाऊंगा।
सवाल: आपके अध्यक्षीय कार्यकाल को किस रूप में कार्यकर्ता याद रखें?
हेमंत: कार्यकर्ता मुझे एक कार्यकर्ता के रूप में ही याद रखें।
