
नागपुर पूर्व विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र (ग्राफिक फोटो)
नागपुर: महाराष्ट्र में जल्दी ही विधानसभा चुनाव शुरू होने वाला है। चुनाव के लिए राजनीतिक दलों और नेताओं ने अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है। इस दौरान कुछ नेता संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं तो कुछ विधानसभा क्षेत्रों में घूमकर जनता से मेल जोल बढ़ा रहे हैं। चुनावी समर की इस बेला में आज हम नागपुर पूर्व विधानसभा सीट के बारे में बात करने वाले हैं। तो चलिए जानते हैं इस सीट का इतिहास, यहां के जातीय समीकरण और संभावनाओं की।
मौजूदा समय में पूर्व नागपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में विराजमान है। 2009 से ही इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है। भाजपा के कृष्ण खोपड़े लगातार तीन बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं। वहीं 2019 के विधानसभा चुनाव में भी कृष्ण खोपड़े ने 52.35 प्रतिशत वोट के साथ चुनाव जीता। जहां उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार पुरुषोत्तम हजारे को 24 हज़ार से अधिक वोटों से मात दी थी।
पूर्व नागपुर विधानसभा सीट का गठन 1978 में हुआ था। जहां उसी साल पहली बार इस सीट पर चुनाव हुआ था। उस समय पूर्व नागपुर विधानसभा सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। जब से यह सीट का गठन हुआ है तब से लेकर 2004 तक इस सीट पर कांग्रेस ने ही अपना कब्जा कर रखा था। 1978 में सबसे पहले यहां बनवारी लाल पुरोहित ने चुनाव जीता था। जिसके बाद कांग्रेस की टिकट पर सतीश चतुर्वेदी पांच और अविनाश पांडे एक बार चुनाव जीते हैं। हालांकि 2009 से भाजपा के कृष्णा खोपडे़ यहां से लगातार चुनाव जीत रहे हैं और इस सीट पर भाजपा का राज चला रहे हैं।
यह भी पढ़ें- देवली विधासभा सीट: शुरू से है रंजीत प्रतापराव का दबदबा, क्या इस बार बीजेपी भेद पाएगी कांग्रेस का किला
पूर्व नागपुर में आद्योगिक क्षेत्र है। इस विधानसभा क्षेत्र में स्मॉल फैक्ट्री एरिया सहित शहर के सभी होलसेल मार्केट हैं। जिसमें मशहूर हल्दीराम का कारखाना भी आता है। साथ ही नागपुर सहित आस पास के जितने भी बड़े उद्योगपति हैं वह भी इसी क्षेत्र में रहते हैं। इसके अलावा इसी विधानसभा क्षेत्र में मध्य भारत की सबसे बड़ी अनाज मंडी कलमाना एपीएमसी भी है।
आद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में मारवाड़ी, अग्रवाल, पटेल, छत्तीसगढ़ी सहित अन्य समाज के लोग रहते हैं। 2011 की जनगणना की मानें तो नागपुर पूर्व विधानसभा में एससी मतदाता लगभग 67,183 हैं, जो कुल जनसंख्या का 18.73% हैं। एसटी मतदाता लगभग 32,533 और मुस्लिम 32,641 है जो क्रमश: जनसंख्या का 9.07 और 9.1 प्रतिशत है। उसके अलावा ओबीसी और जनरल वर्ग के मतदाता भी शामिल है। साथ ही इस क्षेत्र में जैन, बौद्ध, सिख मतदाता भी हैं, जो अपने मतों का इस्तेमाल करके वोट देते हैं।
पूर्व नागपुर विधानसभा क्षेत्र की प्रमुख मुद्दों में सड़क और अनाधिकृत लेआउट आते गैं। ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े होने की वजह से इस क्षेत्र में बीना किसी प्लान के तहत लेआउट बन गए हैं, जिसके कारण वहां मूलभूत सुविधाओं की कमी हो गई है। इसी के भांडेवाड़ी डंपिंग यार्ड को स्थानांतरित करना भी प्रमुख मुद्दा है। यातयात और ट्रैफिक भी चुनावी मुद्दो में शामिल लेकिन वर्तमान में इसे दूर करने का काम किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें- जलगांव शहर विधानसभा सीट: लगातार दो जीत से बीजेपी के हौसले बुलंद, क्या इस बार MVA लगा पाएगी सेंध?
पूर्व नागपुर विधानसभा सीट एक समय कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। लेकिन हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में एक तरफ शहर के कई विधानसभा क्षेत्रों में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पिछड़ते हुए दिखाई दिए लेकिन पूर्व नागपुर में वह अपने समकक्ष उम्मीदवार से 72 हजार वोटों से आगे रहे। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि इस बार भी भाजपा अपना कब्जा बरकरार रख सकती है।






