देवली विधासभा सीट: शुरू से है रंजीत प्रतापराव का दबदबा, क्या इस बार बीजेपी भेद पाएगी कांग्रेस का किला

महाराष्ट्र में चुनावों का औपचारिक शंखनाद भले ही अभी बाकी है लेकिन अनौपचारिक बिगुल बज चुका है। सभी सियासी दल हर एक सीट के लिए उम्मीदवारों को फाइनल करने की जद्दोजेदह में जुटे हुए हैं। यहां हर एक विधानसभा सीट के अलग समीकरण हैं। कहीं पर किसी के लिए अपना गढ़ बचाने की चुनौती है तो कहीं पर किसी के पास किसी का किला भेदने का चैलेंज। यही वजह है कि हम सीट दर सीट विवरण लेकर आ रहे हैं।
देवली विधासभा सीट का इतिहास
देवली विधासभा सीट का इतिहास (ग्राफिक फोटो)
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वर्धा: महाराष्ट्र में चुनावों का औपचारिक शंखनाद भले ही अभी बाकी है लेकिन अनौपचारिक बिगुल बज चुका है। सभी सियासी दल हर एक सीट के लिए उम्मीदवारों को फाइनल करने की जद्दोजेदह में जुटे हुए हैं। यहां हर एक विधानसभा सीट के अलग समीकरण हैं। कहीं पर किसी के लिए अपना गढ़ बचाने की चुनौती है तो कहीं पर किसी के पास किसी का किला भेदने का चैलेंज। यही वजह है कि हम सीट दर सीट विवरण लेकर आ रहे हैं। जिससे अगर आप भी सियासत में दिलचस्पी लेते हैं तो आपको भी फैक्ट्स पता रहें।

देवली विधानसभा सीट वर्धा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यहां पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं का वर्चस्व माना जाता है। क्योंकि संख्याबल के हिसाब से यह दोनों ही किसी भी पार्टी या उम्मीदवार की जीत हार तय करने की ताकत रखते हैं। यही वजह है कि देवली विधानसभा की समूची सियासत इन्हीं दो जातियों के मुद्दों के आस-पास घूमती नजर आती है।

साल 2009 में विधानसभा के गठन के बाद यहां तीन के तीन बार कांग्रेस ने कब्जा जमाया है। इतना ही नहीं तीनों बार यहां कांग्रेस ने रंजीत प्रतापराव कांबले को उम्मीदवार बनाया है और हर बार वह जीत दर्ज करने में कामयाब रहे हैं। इतना ही नहीं पहली बार 3 हजार 746 वोटों से जीत दर्ज की थी लेकिन दूसरी बार यह मार्जिन केवल 943 का बचा। तब लगा कि विपक्ष के लिए मौका हो सकता है। लेकिन 2019 के चुनाव में रंजीत प्रतापराव कांबले ने 35 हजार 804 वोटों से जीत दर्ज करते हुए सारी संभावनाओं को निरस्त कर दिया।

कैसे हैं यहां के जातीय समीकरण?

देवली विधानसभा सीट पर एससी-एसटी वोटर्स का वर्चस्व माना जाता है। 2019 के आंकड़ों के मुताबिक यहां कुल 2 लाख 70 हजार 312 वोटर्स हैं। जिनमें अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 47629 हैं, जो कि 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 17.62 फीसदी है। इसके अलावा अनुसूचित जनजाति के मतदाता भी लगभग 31,897 हैं। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 8,109 है। देवली विधानसभा में ग्रामीण मतदाताओं की संख्या लगभग 224,224 है, जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 82.95% है।

बर बार कांग्रेस ने मारी बाजी

  • 2019 रंजीत प्रतापराव कांबले, कांग्रेस
  • 2014 रंजीत प्रतापराव कांबले, कांग्रेस
  • 2009 रंजीत प्रतापराव कांबले, कांग्रेस

अबकी बार, किसका बेड़ा पार

2009 देवली विधानसभा सीट पर कांग्रेस के नेता रंजीत प्रतापराव कांबले का एक-छत्र राज रहा है। ऐसे में बीजेपी या महायुति में शामिल दलों पास कांग्रेस का यह किला भेदने का मौका है। जबकि कांग्रेस के पास यह दिखाने का अवसर है कि यहां दबदबा था, दबदबा है और दबदबा बना रहेगा। हालांकि इस बार यहां भी चुनाव दिलचस्प होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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