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Kerala Election 2026: केरलम की खूबसूरत वादियों में इन दिनों चुनावी शोर अपने चरम पर है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिन नेताओं के हाथों में आप अपनी और अपने परिवार की किस्मत सौंपने जा रहे हैं, उनका कुल हिसाब-किताब क्या है? आइए हम आपको बताते हैं।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और केरलम इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट ने राज्य के चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों के दावों की पोल खोल दी है। यह रिपोर्ट न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि एक आम नागरिक को यह सोचने पर मजबूर करती है कि लोकतंत्र में ‘योग्यता’ की जगह ‘मनी’ और ‘मसल पावर’ ने कितनी गहराई तक पैठ बना ली है। रिपोर्ट बताती है कि इस बार मैदान में उतरने वाले हर तीन में से एक उम्मीदवार के दामन पर दाग है।
इस बार केरलम विधानसभा चुनाव के रण में उतरे 863 उम्मीदवारों के हलफनामों को जब खंगाला गया, तो पता चला कि उनमें से 324 (तकरीबन 38%) उम्मीदवारों ने खुद स्वीकार किया है कि उन पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। इससे भी अधिक डरावना सच यह है कि 201 (23%) उम्मीदवार तो ऐसे हैं जिन पर हत्या, हत्या के प्रयास और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे बेहद गंभीर आरोप हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिया था कि पार्टियों को यह बताना होगा कि उन्होंने बेदाग छवि वाले लोगों को छोड़कर दागी उम्मीदवारों को ही टिकट क्यों दिया। इस पर जवाब देते हुए केंद्र ने हलफनामा लगाकर कहा था कि तय करने का अधिकार संसद का है। लेकिन पार्टियों की दलीलें आज भी केवल ‘लोकप्रियता’ के इर्द-गिर्द ही घूम रही हैं। कांग्रेस (INC) के 85% और माकपा (CPI-M) के 66% उम्मीदवार आपराधिक मामलों वाले हैं, जो बताता है कि बाहुबल के प्रति राजनीतिक दलों का मोह कम नहीं हुआ है।
एडीआर रिपोर्ट के अनुसार, इस बार 339 उम्मीदवार ऐसे हैं जो ‘करोड़पति’ क्लब का हिस्सा हैं। साल 2021 के चुनाव में यह संख्या महज 27% थी, जो अब बढ़कर 39% हो गई है। यानी पिछले पांच सालों में अमीरों की हिस्सेदारी में भारी इजाफा हुआ है। दिलचस्प बात तो यह है कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की औसत संपत्ति अब 2.78 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो पिछले चुनाव में 1.69 करोड़ थी। केरलम कांग्रेस के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति तो 39.64 करोड़ रुपये तक है। फिर से चुनाव लड़ने वाले 104 विधायकों की संपत्ति में भी औसतन 21% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो एक आम आदमी की सामान्य कमाई के मुकाबले कहीं ज्यादा है।
केरलम को देश का सबसे साक्षर राज्य माना जाता है, और यह बात उम्मीदवारों की शिक्षा में भी थोड़ी-बहुत झलकती है। लगभग 46% उम्मीदवार ग्रेजुएट या उससे अधिक पढ़े-लिखे हैं, जबकि 48% उम्मीदवार 5वीं से 12वीं तक ही पढ़े-लिखे हैं। हालांकि, जब बात महिला प्रतिनिधित्व की आती है, तो तस्वीर काफी धुंधली हो जाती है।
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राज्य की कुल आबादी में महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी होने के बावजूद, इस चुनाव में केवल 11% महिला उम्मीदवार ही मैदान में हैं। उम्र के लिहाज से देखें तो 58% उम्मीदवार 41 से 60 वर्ष के बीच के हैं, जो राजनीति में पुराने चेहरों को प्राथमिकता मिलने का संकेत है।