तमिलनाडु चुनाव: कोयंबटूर दक्षिण में होगा महामुकाबला! क्या वनथी श्रीनिवासन बचा पाएंगी भाजपा का ‘शहरी’ दुर्ग?
Tamil Nadu Election: कोयंबटूर दक्षिण एक हाई-वोल्टेज शहरी सीट है, जहां अल्पसंख्यकों और व्यापारियों का वोट जीत की चाबी है। 2021 के बेहद करीबी मुकाबले के बाद 2026 की जंग नए समीकरणों के बीच लड़ी जाएगी।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
फोटो- नवभारत
Coimbatore South Seat 2026: तमिलनाडु के औद्योगिक केंद्र के दिल में बसा ‘कोयंबटूर दक्षिण’ राज्य की सबसे चर्चित शहरी सीटों में से एक है। यह इलाका अपने घने व्यापारिक गलियारों, पुराने रिहायशी इलाकों और वैचारिक ध्रुवीकरण के लिए जाना जाता है।
2026 के विधानसभा चुनावों की आहट के बीच यहां की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। यहां की जीत केवल एक विधायक नहीं चुनती, बल्कि यह शहरी शासन के प्रदर्शन और सामुदायिक विश्वास का एक बड़ा लिटमस टेस्ट भी होती है।
जब 1728 वोटों ने बदला फैसला
कोयंबटूर दक्षिण की चर्चा 2021 के उन नतीजों के बिना अधूरी है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। उस चुनाव में भाजपा की राष्ट्रीय महिला मोर्चा अध्यक्ष वनथी श्रीनिवासन ने एक बेहद कड़े मुकाबले में सुपरस्टार कमल हासन को मात्र 1,728 वोटों के अंतर से हराया था। वनथी श्रीनिवासन को 53,209 वोट (34.4%) मिले थे, जबकि कमल हासन 51,481 वोटों पर सिमट गए थे। तीसरे नंबर पर कांग्रेस के मयूरा एस. जयकुमार रहे थे, जिन्हें 42,383 वोट मिले थे। यह जीत भाजपा के लिए दक्षिण में अपनी जड़ें जमाने का एक बड़ा प्रतीक बनी थी।
सम्बंधित ख़बरें
Bengal CM Oath: सुवेंदु अधिकारी बने CM, शंखनाद कर कर दिया बड़ा ऐलान! देखें वीडियो
जब भरे मंच पर भावुक हो गए सुवेंदु अधिकारी, पीएम मोदी ने थपथपाई पीठ, तस्वीरों में देखिए वो खास पल
TVK सरकार पर सस्पेंस खत्म? VCK नेता के बयान ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी, विजय के CM बनने का रास्ता साफ
शपथ ग्रहण के मंच से पीएम मोदी ने बंगाल की जनता को किया नमन, दंडवत प्रणाम कर जताया आभार
कोयंबटूर दक्षिण में जीत का असली गणित क्या है?
इस निर्वाचन क्षेत्र का सामाजिक ढांचा बेहद जटिल है। यहां मुस्लिम समुदाय की संख्या काफी अधिक और निर्णायक है। इसके साथ ही, थोक और खुदरा बाजारों के व्यापारी, मध्यम वर्गीय परिवार और अनुसूचित जाति (SC) के मतदाता यहां के चुनावी नतीजों को तय करते हैं।
यहां के मतदाता किसी ऐसे चेहरे पर भरोसा करते हैं जो न केवल दिखने में सक्रिय हो, बल्कि सांप्रदायिक या नागरिक तनाव के समय तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो। ‘स्ट्रीट-लेवल’ गवर्नेंस यहां के चुनावों की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा कारक है।
जनता की असली समस्या क्या है?
एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र होने के बावजूद कोयंबटूर दक्षिण कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। यहां की संकरी गलियों में ट्रैफिक जाम और पार्किंग की कमी व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए बड़ी मुसीबत है। इसके अलावा, पीने के पानी की अनियमित आपूर्ति और सीवरेज की पुरानी व्यवस्था यहां के मुख्य चुनावी मुद्दे हैं।
कानून-व्यवस्था, सामुदायिक सुरक्षा और महंगाई का बढ़ता बोझ भी मतदाताओं के मूड को प्रभावित कर रहा है। लोग चाहते हैं कि उनका विधायक नागरिक शिकायतों के निवारण के लिए हमेशा उपलब्ध रहे।
कमल हासन बाहर, विजय की एंट्री और गठबंधनों का खेल
2026 की जंग 2021 से काफी अलग होने वाली है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि कमल हासन की पार्टी MNM ने चुनाव न लड़ने का फैसला किया है और वह डीएमके गठबंधन को बिना शर्त समर्थन दे रही है। वहीं, सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK सभी 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है, जो शहरी युवाओं के वोट बांट सकती है।
यह भी पढ़ें: बंगाल चुनाव से पहले सीएम ममता का बड़ा दांव, 23 पदों से इस्तीफा देकर विभागों से बनाई दूरी, क्या हैं इसके मायने?
दूसरी ओर, भाजपा इस बार एनडीए गठबंधन के तहत राज्य में 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि एआईएडीएमके ने अपने 23 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर पलानीस्वामी को एडप्पादी से मैदान में उतारा है। कोयंबटूर दक्षिण की जागरूक जनता इन बदलते समीकरणों के बीच विकास और सुरक्षा के दावों पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
