संजय राउत का बड़ा आरोप: 'भाजपा का प्रचारक था भोंदू बाबा अशोक खरात, 2018 में दिया गया था 1.5 करोड़ का फंड'

Sanjay Raut On Ashok Kharat: संजय राउत ने अशोक खरात को भाजपा का प्रचारक बताया। 2018 में मंदिर को मिले 1.5 करोड़ के फंड और पीड़ितों की पहचान उजागर होने पर गृह मंत्री को घेरा।
Sanjay Raut On Ashok Kharat
Sanjay Raut On Ashok Kharat प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
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Ashok Kharat BJP Connection: नासिक के बहुचर्चित 'भोंदू बाबा' अशोक खरात मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया उबाल पैदा कर दिया है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी पर सीधा हमला बोलते हुए अशोक खरात को "भाजपा का आधिकारिक प्रचारक" करार दिया है। राउत ने आरोप लगाया कि इस पूरे 'पाप' में भाजपा सबसे बड़ी भागीदार है और उसे इसका प्रायश्चित करना चाहिए।

जैसे-जैसे खरात के राजनीतिक रसूख के सबूत सामने आ रहे हैं, सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है।

2018 का सरकारी आदेश (GR) बना हथियार

संजय राउत ने युति सरकार (2018) के समय का एक सरकारी आदेश (GR) पेश किया है, जिसमें तत्कालीन पर्यटन मंत्री जयकुमार रावल ने खरात के 'ईशान्येश्वर मंदिर' के लिए 1.5 करोड़ रुपये का फंड मंजूर किया था। राउत ने कहा, "भाजपा और संघ परिवार की नीति ही बुआ-बाबाओं की फौज खड़ी करने की रही है। उन्होंने वारकरी संप्रदाय जैसे पवित्र मंचों को भी राजनीति में घसीटा है। खरात भाजपा के लिए काम कर रहा था और सरकार उसे सरकारी खजाने से पाल रही थी।"

पीड़ित महिलाओं की पहचान उजागर होने पर आक्रोश

संजय राउत ने गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए पीड़ित महिलाओं की गोपनीयता भंग होने पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि बलात्कार पीड़ित महिलाओं के फोटो और वीडियो इस तरह खुलेआम वायरल हों। जप्त किए गए मोबाइल पुलिस के पास थे और पुलिस विभाग फडणवीस के पास है। नासिक जैसे कानून के गढ़ में महिलाओं की पहचान उजागर होना सरकार के लिए शर्म की बात है।" उन्होंने एसआईटी प्रमुख तेजस्विनी सातपुते से इस 'लीक' की भी निष्पक्ष जांच करने की मांग की।

रूपाली चाकणकर का इस्तीफा और राजनीतिक घमासान

अशोक खरात मामले की आंच केवल भाजपा तक सीमित नहीं है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की नेता रूपाली चाकणकर को भी राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा है, क्योंकि उनके खरात को 'गुरु' मानने वाले वीडियो और फोटो वायरल हुए थे। संजय राउत ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विधानसभा में केवल चुनिंदा बातें पढ़कर सुनाने से काम नहीं चलेगा; सरकार को यह स्वीकार करना होगा कि उनके अपने लोग भी इस दलदल में शामिल थे।

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