शपथ ग्रहण के मंच से पीएम मोदी ने बंगाल की जनता को किया नमन, दंडवत प्रणाम कर जताया आभार
Suvendu Adhikari Oath Ceremony: सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह के मंच से पीएम मोदी ने बंगाल की जनता को दंडवत प्रणाम किया। पीएम मोदी ने इस अंदाज में लोगों का आभार व्यक्त किया।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
बंगाल की जनता के सामने दंडवत हुए पीएम मोदी, फोटो- सोशल मीडिया
PM Modi Thankful Gesture to Bengal: पश्चिम बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की जनता के प्रति अपना आभार और सम्मान प्रकट करते हुए मंच पर लेटकर साष्टांग प्रणाम किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, “मैं पश्चिम बंगाल की जनशक्ति को नमन करता हूं।” यह सोशल मीडिया पोस्ट उस ऐतिहासिक जनादेश की स्वीकृति थी जिसने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
दरअसल, पश्चिम बंगाल में नई सरकार का गठन और भाजपा के पहले मुख्यमंत्री का शपथ लेना केवल एक चुनावी सफलता के साथ-साथ लंबी राजनीतिक यात्रा का परिणाम है। गुरुदेव टैगोर की जयंती के पवित्र अवसर पर शुरू हुई यह नई पारी और एक राष्ट्रसेवक के रूप में प्रधानमंत्री का साष्टांग प्रणाम, बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक अमिट चित्र के रूप में दर्ज हो गया है।
बिहार के बाद बंगाल में संभाली कमान
बिहार के बाद अब पश्चिम बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री ने कमान संभाली है। इस ऐतिहासिक क्षण ने राजनीतिक विश्लेषकों को प्रधानमंत्री मोदी के उस दूरदर्शी वक्तव्य की याद दिला दी है, जो उन्होंने बिहार चुनाव के नतीजों के समय दिया था। उस जीत के बाद पीएम मोदी ने साफ संकेत दिया था कि बिहार के नतीजों ने बंगाल का रास्ता खोल दिया है। आज वह रणनीतिक आकलन धरातल पर सच साबित हुआ है और बंगाल के राजनीतिक दुर्ग में एक नई सरकार का प्रवेश हुआ है।
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रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती ने इसे और खास बनाया
इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण का महत्व तब और गहरा हो जाता है जब हम इसके समय पर गौर करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल की जनशक्ति को नमन करने और नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का यह आयोजन गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती का पावन दिन भी है। बंगाल की सांस्कृतिक चेतना और अस्मिता के प्रतीक गुरुदेव के जन्मदिवस पर सत्ता का यह परिवर्तन मात्र एक संयोग नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेश है। भाजपा नेताओं की मानें तो यह सरकार के उस संकल्प को सांस्कृतिक आधार प्रदान करने का प्रयास है, जिसे चुनाव के दौरान ‘सोनार बांग्ला’ के रूप में परिकल्पित किया गया था।
