ओवैसी और कबीर (सोर्स- आईएएनएस)
Humayun Kabir And AIMIM Alliance: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इसी बीच बुधवार को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम और हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी ने आधिकारिक तौर पर गठबंधन का ऐलान कर दिया है। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओवैसी ने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, हमारी पार्टी एआईएमआईएम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हमारे भाई हुमायूं कबीर के साथ मिलकर लड़ रही है।
उन्होंने बताया कि ज्यादातर सीटों पर सहमति बन चुकी है और एक-दो सीटों पर बातचीत जल्द ही पूरी हो जाएगी। यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कई बड़े बयान भी दिए।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान न केवल भाजपा बल्कि टीएमसी पर भी बराबर निशाना साधा। इसके अलावा जब उनसे सवाल पूछा गया कि एआईएमआईएम पर भाजपा की ‘बी टीम’ होने के आरोप लगते हैं। तब उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि मुसलमानों की पूरी टीम हम ही हैं, हम ‘टीम एम’ हैं।
Newtown, West Bengal: AIMIM Chief Asaduddin Owaisi On TMC leader Kalyan Banerjee remarks, says, ”We are the whole team of Muslims. We are Team M” pic.twitter.com/HyXI0EdLXz — IANS (@ians_india) March 25, 2026
ओवैसी ने सवाल पूछते हुए आगे कहा कि जब गुजरात जल रहा था, तब ममता कहां थी? किसके साथ बैठकर ढोकला खा रहीं थी। अब औवेसी के इस बयान के बाद बंगाल चुनाव में पारा हाई हो गया है। जहां एकतरफ औवेसी बी टीम होने का दावा कर रहे हैं और साथ ही वह ममता बनर्जी पर ऐसे आरोप लगा रहे हैं, इससे ममता बनर्जी के वोटबैंक में बड़ा फर्क दिख सकता है।
हुमायूं कबीर ने इस गठबंधन को मजबूत बताते हुए कहा कि 23 और 29 अप्रैल को होने वाले चुनावों के लिए मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं और एकजुट रहने का संकल्प लेता हूं। उन्होंने आगे कहा कि वह अपने ‘बड़े भाई असदुद्दीन ओवैसी’ के हर फैसले और दिशा के साथ आगे बढ़ेंगे। हुमायूं कबीर ने कहा कि यह गठबंधन कभी नहीं टूटेगा।
कबीर ने आगे कहा कि मेरे भाई असदुद्दीन ओवैसी ने 2026 में इसकी शुरुआत की है और जब तक मैं जिंदा हूं, मेरी पार्टी एआईएमआईएम के साथ रहेगी। हम इन्हें अपने अभिभावक और बड़े भाई की तरह मानते हैं। उन्होंने भविष्य में लोकसभा चुनाव भी साथ लड़ने का ऐलान किया।
ममता बनर्जी को इस चुनाव में काफी नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है, अब ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय जनता पार्टी पहले से ही टीएमसी के सामने मजबूती से खड़ी है। अब मुसलमानों के मुद्दे को उठाने के लिए ओवैसी और कबीर साथ आ गए हैं। ऐसे में वोटो में कटौती हो सकती है। जिसका सीधा फायदा बीजेपी के नतीजो में देखने को मिल सकता है।
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अब कई जानकारों का मानना है कि उनके खिलाफ सत्ता विरोधी लहर तो है ही, साथ ही कानून व्यवस्था, विकास और बेरोजगारी जैसे मुद्दे भी हैं। जिनका जवाब भी ममता को ही देना होगा। इसके अलावा कई जानकारों का तो यह भी कहना है कि 2011 का चुनाव ममता के सामने वामपंथी शासन को हटाने का चुनाव था तो वहीं 2026 का बंगाल विधानसभा चुनाव उनके लिए बंगाल की सत्ता को भारतीय जनता पार्टी से बचाने की लड़ाई है।