Bengal Chunav 2026: ममता के शत्रु पहुचाएंगे BJP को फायदा! कबीर और ओवैसी के साथ आने से चुनाव पर कितना असर?

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को नुकसान पहुंचाने के लिए साथ आ गए हैं हुमायूं कबीर और ओवैसी। अब TMC के नुकसान से भाजपा को कितना फायदा होगा?
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026
ममता, कबीर, ओवैसी (सोर्स- डिजाइन इमेज)
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Humayun Kabir And Owaisi Alliance: बंगाल चुनाव में एक नया गठबंधन सामने आया है। बंगाल के ओवैसी के साथ आ गए हैं हैदराबाद वाले ओवैसी। अब इस गठबंधन से ममता को नुकसान हो या ना हो लेकिन भाजपा को फायदा जरूर हो सकता है। गौरतलब है कि ओवैसी को हमेशा से ही भाजपा की बी-टीम बोला जाता है। इस बीच जब हुमायूं कबीर भी बंगाल में उभरे तब उन्हें भी बीजेपी की बी-टीम कहा जाने लगा।

अब हुमायूं कबीर तो यह साफ कह चुके हैं कि उनकी लड़ाई भाजपा और ममता बनर्जी दोनों से है लेकिन राजनीति में जो दिखाया जाता है वो होता नहीं है बल्कि होता वो है जो दिखाया नहीं जाता। खैर, हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेडीयूपी) ने पहले ही ऐलान किया है कि उनकी पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। इस गठबंधन में AIMIM भी साझेदार होगी और लगभग 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है।

कबीर को मिला ओवैसी का साथ

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी हुमांयू कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। ओवैसी 25 मार्च को कोलकाता में हुमायूं कबीर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन की रूपरेखा रखेंगे।

सुवेंदु अधिकारी के करीबी हैं 'कबीर'?

दरअसल, एआईएमआईएम प्रवक्ता सैयद असीम वकार ने हुमायूं कबीर पर आरोप लगाए थे कि वह भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के करीबी हैं और उन्होंने कबीर को सुवेंदु अधिकारी के पॉलिटिकल सिस्टम का हिस्सा भी बताया था। जिसके बाद ऐसा माना जा रहा था कि ओवैसी और कबीर का गठबंधन नामुमकिन है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि कबीर के प्रस्ताव हमारी विचारधारा के बिलकुल विपरीत हैं।

ममता बनर्जी को डबल नुकसान?

दरअसल, ऐसा माना जा रहा है कि इन दोनों मुस्लिम नेताओं के साथ आने से ममता बनर्जी को नुकसान पहुंच सकता है क्योंकि हुुमांयू कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद में बनवाई जा रही बाबरी मस्जिद एक भावनात्मक मुद्दा है। ऐसे में जब कबीर मस्जिद बनाने का ऐलान कर चुके थे तब ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया था। अब कबीर और ओवैसी दोनों मिलकर इस मुद्दे को जनता के सामने उठा सकते हैं जो ममता बनर्जी को नुकसान पहुंचा सकता है।

भाजपा को कैसे होगा फायदा?

ऐसा कहा जाता है कि भारतीय जनता पार्टी जब भी चुनाव लड़ती है तब वह किसी को हराने के उद्देश्य से नहीं लड़ती बल्कि वह तो मिशन की तरह चुनाव लड़ती है। बीजेपी अपने एजेंडा के साथ ही आगे बढ़ रही है। इसका सटीक उदाहरण ईद वाला दिन ही है, जहां ममता एकतरफ ईद मना रही थी तो वहीं दूसरी तरफ सुवेंदु अधिकारी कालीघाट मंदिर में पूजा कर रहे थे। टीएमसी, ओवैसी और कबीर तीनों का टारगेटेड वोटबैंक अल्पसंख्यक हैं। ऐसे में वोट कटने की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। वहीं भाजपा के केस में ऐसा नहीं है वह सिर्फ और सिर्फ हिंदू वोटबैंक पर फोकस कर रही है। जिससे उसका वोटबंक सुरक्षित माना जा रहा है।

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