यूपी में कैबिनेट विस्तार का साइड इफेक्ट! पहले बृजभूषण सिंह और अब इस महिला विधायक ने खोला मोर्चा
Uttar Pradesh Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही पार्टी के अंदर बागियों के आवाज तेज हो गए हैं। पूर्व सांसद और दिग्गज नेता बृजभूषण शरण सिंह भी कैबिनेट विस्तार से नाखुश नजर आए।
- Written By: मनोज आर्या
नए मंत्रियों के साथ सीएम योगी और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, (सोर्स-IANS)
Uttar Pradesh Cabinet Expansion: अगले साल यानी की 2027 विधानसभा चुनाव से पहले रविवार, 10 मई को उत्तर प्रदेश कैबिनेट में बदलाव हुआ। मंत्रिमंडल विस्तार के तहत 2 कैबिनेट मंत्रियों और 4 राज्य मंत्रियों को सरकार में शामिल किया गया। इसके अलावा दो राज्य मंत्रियों को प्रमोशन देकर स्वतंत्र प्रभार मंत्री की जिम्मेदारी दी गई। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन के बजाय जन भवन में आयोजित कार्यक्रम में सभी मंत्रियों को पद और गोपनियता की शपथ दिलाई।
भूपेंद्र चौधरी को योगी कैबिनेट में जगह
योगी कैबिनेट में हुए विस्तार के तहत बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जाट नेता भूपेंद्र चौधरी को मंत्री बनाया गया। ऐसा कहा जा रहा है कि भूपेंद्र चौधरी के जरिए बीजेपी पश्चिमी यूपी के जाट समुदायों को साधना चाहती है। पश्चिमी यूपी में चौधरी का मजबूत जनाधार है और वह जाटों का एक बड़ा चेहरा हैं।
सपा के बागी मनोज पांडे भी बने मंत्री
रायबरेली के ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र से विधायक मनोज पांडे को योगी के नए कैबिनेट में जगह मिली है। वह समाजवादी पार्टी के बागी और ब्रह्माणों के कद्दावर नेता है। इससे पहले वह अखिलेश यादव के सरकार में मंत्री रह चुके हैं। सपा ने उन्हें विधानसभा में मुख्य सचेतक भी बनाया था।
सम्बंधित ख़बरें
यूपी में मंत्रीमंडल विस्तार आज, 6 नेता बनेंगे मंत्री; अखिलेश यादव ने कसा तंज, बोले- 6 महीने में क्या होगा?
बेंगलुरु में गरजे पीएम मोदी, बंगाल की जीत जनता को किया समर्पित, बताया क्यों बदल रही है देश की राजनीति
देश का सब कुछ बेच रही है भाजपा… डिंपल यादव का मोदी सरकार के निजीकरण और महिला सुरक्षा पर जोरदार हमला
Mother’s Day 2026: सोशल मीडिया में छाया इन नेताओं का पोस्ट, मां को बताया पहला गुरु, किसने क्या कहा?
अजीत सिंह पाल का हुआ प्रमोशन
योगी सरकार में राज्यमंत्री अजीत सिंह पाल को प्रमोट किया गया है। वह पूर्व भाजपा विधायक मथुरा प्रसाद के पाल के बेटे हैं। साल 2017 में पिता के निधन के बाद हुए उपचुनाव में पहली विधायक बने। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में कानपुर देहात के सिकंदरा सीट पर दोबारा जीत दर्ज की। जमीनी नेत और पाल में मजबूत पकड़ की वजह से उनका प्रमोशन हुआ है। यह समाज भाजपा का वोट बैंक माना जाता है। प्रमोशन के जरिए पाल समाज को साधने की कोशिश है।
(उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले योगी कैबिनेट का विस्तार)
सोमेंद्र तोमर के जरिए गुर्जरों पर नजर
योगी कैबिनेट में हुए विस्तार में सोमेंद्र तोमर का भी प्रमोशन हुआ है। इससे पहले वह यूपी सरकार में उर्जा एवं वैकल्पिक उर्जा राज्य मंत्री थे। वर्तमान समय में वह मेरठ दक्षिण से विधायक हैं। 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने गुर्जर बिरादरी से आने वाले इस नेता के जरिए पश्चिम यूपी में गुर्जर वोट बैंक को साधने की पूरी कोशिश की है।
दलित महिला नेता को बड़ी जिम्मेदारी
फतेहपुर जिले की खागा विधानसभा सीट से बीजेपी की महिला विधायक कृष्णा पासवान को भी सरकार में मंत्री बनाया गया है। दलित समाज से आने वाली कृष्णा को जूझारु नेता के रूप में देखा जाता है। वह 4 बार की विधायक हैं। इससे पहले वह फतेहपुर जिला बीजेपी अध्यक्ष, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष और SC मोर्चा की राष्ट्रीय सचिव रह चुकी हैं।
सुरेंद्र दिलेर को यूपी सरकार में जगह
अलीगढ़ के खैर से विधायक हैं सुरेंद्र दिलेर दलित समाज से आते हैं। 2024 में हुए उपचुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की थी। जब पिछली सीट पर काबिज BJP के अनूप वाल्मीकि को लोकसभा के लिए चुना गया था। दिलेर एक जाने-माने राजनीतिक परिवार से आते हैं; उनके दादा किशन लाल दिलेर 6 बार विधायक और 4 बार सांसद रहे थे, जबकि उनके पिता राजवीर सिंह दिलेर एक बार सांसद और 2 बार विधायक रहे थे।
हंसराज विश्वकर्मा बने मंत्री
एक दशक तक वाराणसी में बीजेपी जिला अध्यक्ष के रूप में काम करने वाले हंसराज विश्वकर्मा को भी योगी सरकार में मंत्री बनाया गया है। वह ओबीसी समाज से आते हैं। हंसराज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे। उन्हें सरकार में BJP संगठन का चेहरा माना जाता है। इसके अलावा 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान वाराणसी में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी।
शपथ लेने वाले मंत्रियों में कैलाश राजपूत
कन्नौज में तिरवा सीट से विधायक कैलाश राजपूत भी अब यूपी के नए कैबिनेट का हिस्सा होंगे। ओबीसी समुदाय से आने वाले कैलाश का राजनीतिक करियर काफी लंबा रहा है। वह पहली बार 1996 में बीजेपी से विधायक बने, 2007 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर फिर से जीते और बाद में बीजेपी में लौट आए, जहां उन्होंने 2017 और 2022 में जीत हासिल की। 2014 के लोकसभा चुनावों में BJP को राजपूत के निर्वाचन क्षेत्र से 14,000 वोटों की बढ़त मिली थी, जहां BJP उम्मीदवार सुब्रत पाठक ने समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव को 11,000 वोटों के अंतर से हराया था।
बीजेपी के भीतर बागियों के सुर तेज!
उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही पार्टी के अंदर बागियों के आवाज तेज हो गए हैं। आशा मौर्य और बीजेपी के दिग्गज नेता बृजभूषण शरण सिंह के तीखे तेवर देखने को मिले। सीतापुर के महमूदाबाद से विधायक आशा मौर्य का नाम आखिरी वक्त तक चर्चा में था, लेकिन लिस्ट से बाहर होने पर उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना दर्द शेयर किया। सोशल मीडिया पोस्ट में आशा मौर्य ने लिखा कि लगता है पार्टी को अब मौर्य समाज की आवश्यकता नहीं रह गई और बाहर से आए दलबदलुओं को प्राथमिकता दी गई है। विधायक अपने समाज और सम्मान की लड़ाई लड़ती रहेगी।
आप सभी पत्रकार बंधुओं, देश-प्रदेश से प्राप्त हुए फ़ोन कॉल, सोशल मीडिया के माध्यम से शुभकामनाएँ एवं समर्थन देने वाले सभी शुभचिंतकों, समर्थकों और स्नेह रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति का हृदय से आभार एवं धन्यवाद। आप सभी का प्रेम, आशीर्वाद और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। आपके… pic.twitter.com/Bpe0sEpD1t — Asha Maurya (@ashamaurya_bjp) May 10, 2026
बृजभूषण शरण सिंह का तीखा तेवर
आशा मौर्य के अलावा भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद और दिग्गज नेता बृजभूषण शरण सिंह भी कैबिनेट विस्तार से नाखुश नजर आए। ऐसा माना जा रहा था कि वे अपने बेटे प्रतीक भूषण के लिए यूपी मंत्रिमंडल में जगह चाहते थे। हालांकि, किसी ठाकुर चेहरे को जगह न मिलने पर उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए शायराना अंदाज में निशाना साधते हुए लिखा- “शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है, जिस शाख पर बैठे हो वह टूट भी सकती है।”
*“शोहरत की बुलंदी भी
पल भर का तमाशा है
जिस शाख़ (डाल) पे बैठे हो
वो टूट भी सकती है”* — BrijBhushan Sharan Singh (@b_bhushansharan) May 10, 2026
यह भी पढ़ें:UP में योगी मंत्रिमंडल का विस्तार, भूपेन्द्र चौधरी समेत 6 नेताओं ने ली मंत्री पद की शपथ
योगी कैबिनेट का जातीय समीकरण
विधानसभा चुनाव से पहले हुए कैबिनेट विस्तार के बाद 60 मंत्री पद भर चुके हैं। योगी के नए कैबिनेट में सवर्ण मंत्रियों की संख्या 22 है। जबकि ओबीसी मंत्रियों की संख्या 25 है और दलित मंत्रियों की संख्या 11 है। इसके अलावा 1 मुसलमान और 1 सिख मंत्री को भी कैबिनेट में शामिल हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सदस्य हैं, इसलिए मंत्रिपरिषद का अधिकतम आकार 60 हो सकता है। इस विस्तार से पहले, 54 मंत्री थे, जिससे छह पद खाली थे।
