बंगाल में दुर्भाग्यपूर्ण हालत... चुनाव आयोग और ममता सरकार पर सुप्रीम कोर्ट ने की तीखी टिप्पणी

TMC VS EC : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बंगाल में दुर्भाग्यपूर्ण हालत हैं। चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल सरकार एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। दोनों में विश्वास की कमी स्पष्ट रूप से नजर आती है।
Supreme Court makes major statement on Muslim women's plea for equal rights, says UCC is now a path to equality...
सुप्रीम कोर्ट (इमेज-सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Supreme Court On Bengal SIR : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष सुधार (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने आज बेहद सख्त रुख अपनाया। ममता बनर्जी सरकार और चुनाव आयोग (EC) के बीच जारी खींचतान पर नाराजगी जताते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य में हालात दुर्भाग्यपूर्ण हैं। कोर्ट ने साफ तौर पर सरकार के लचर रवैये को आड़े हाथों लिया और कहा कि दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच अविश्वास की कमी के कारण पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया दांव पर लगी है।

सुनवाई के दौरान जब चुनाव आयोग ने बताया कि राज्य सरकार SIR प्रक्रिया के लिए अधिकारी उपलब्ध नहीं करा रही है तो चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि 9 फरवरी के हमारे स्पष्ट आदेश के बावजूद राज्य सरकार का रुख बेहद निराशाजनक है। एसडीएम स्तर के अधिकारियों के बिना यह काम नहीं हो सकता, ऑफिस क्लर्क यह जिम्मेदारी नहीं निभा सकते। कोर्ट ने चेतावनी दी कि बंगाल सरकार ऐसी स्थिति पैदा कर रही है जहां न्यायिक अधिकारियों को दखल देना ही पड़ेगा।

जमीनी हकीकत और भाषा का संकट

बेंच में शामिल जस्टिस बागची ने एक महत्वपूर्ण बिंदु की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग बाहर से अधिकारी लाता है तो बंगाली भाषा न जानने के कारण वे जमीनी स्तर पर लोगों की मदद नहीं कर पाएंगे। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि यदि एसआईआर प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हुई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सुझाव दिया कि यदि राज्य सहयोग नहीं करता है तो दूसरे राज्यों के आईएएस या न्यायिक अधिकारियों की मदद ली जा सकती है।

गतिरोध खत्म करने के लिए सुपर मीटिंग का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने इस संवैधानिक गतिरोध को तोड़ने के लिए एक अभूतपूर्व निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि कल यानी शनिवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक होगी। इसमें राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी, एडवोकेट जनरल और राज्य चुनाव आयुक्त को अनिवार्य रूप से शामिल होना होगा। बैठक का मुख्य उद्देश्य एसआईआर प्रक्रिया को पूरा करने के लिए रास्ता निकालना है।

वोटर लिस्ट और हिंसा पर सख्त निर्देश

अदालत ने कहा कि 28 फरवरी को एक लिस्ट जारी की जा सकती है, लेकिन उसे अंतिम न मानकर बाद में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट निकाली जाए। साथ ही बंगाल में चुनावी हिंसा की शिकायतों पर भी कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के डीजीपी को हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि अब तक हिंसा की शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई है। इस सुनवाई ने साफ कर दिया है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट किसी भी प्रकार के समझौते के मूड में नहीं है।

Navbharat Live
navbharatlive.com