नवभारत संपादकीय: आपसी सम्मान के साथ चुनाव लड़ने की सीख

Hate Speech Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनेता संवैधानिक नैतिकता व सम्मान के साथ चुनाव लड़ें। भड़काऊ भाषणों पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजनीतिक दलों को बंधुभाव की जिम्मेदारी याद दिलाई।
Navbharat Editorial: Lessons from contesting elections with mutual respect
सुप्रीम कोर्ट सुनवाई ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Published on: 
Updated on: 

Constitutional Morality in Elections: सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की पीठ ने कहा है कि राजनेताओं को संवैधानिक नैतिकता का पालन करते हुए आपसी सम्मान के साथ चुनाव लड़ने चाहिए, चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची व जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को देश में बंधुभाव कायम रखने का दायित्व लेना होगा।

सुप्रीम कोर्ट 9 व्यक्तियों द्वारा दायर याचिका की सुनवाई कर रहा था, जिसमें कहा गया था कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों को भड़काऊ भाषण देने से रोका जाए, यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा हाल ही में एक विशिष्ट समुदाय के खिलाफ दिए गए भाषणों तथा बीजेपी की असम इकाई द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो को लेकर सामने आया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि हालात बहुत जहरीले हो गए हैं तथा यह याचिका किसी खास व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। इस पर सीजेआई ने कहा कि यह याचिका सीधे सरमा के खिलाफ है, क्योंकि उन्हीं के भाषणों का संदर्भदिया गया है।

इस पर सिब्बल ने कहा कि वह याचिका से सरमा का संदर्भ हटाने को तैयार हैं। पीठ ने कहा कि याचिका किसी एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि सभी ऐसे लोगों के खिलाफ होनी चाहिए, जो भड़काने वाले भाषण देते हैं।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को स्वयं ही देश में भ्रातृभाव को बढ़ावा देना चाहिए, मान लिया जाए कि अदालत ने मार्गदर्शिका बना दी, तो कौन उसका पालन करेगा? जस्टिस बागची ने कहा कि पहले भी कौशल किशोर व अजीत देवगन ने ऐसी मार्गदर्शिका बनाई थी, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ। इसको लागू करने की जिम्मेदारी राजदलों पर होनी चाहिए।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि लोकसेवकों को सेवा नियमों का पालन करना चाहिए, उन्हें संवैधानिक नैतिकता का ध्यान रखना होगा। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि भाषण की शुरूआत विचारों से होती है।

आप विचारों को कैसे रोक सकते हैं? हमें उन विचारों को मिटाना होगा जो संवैधानिक आदर्शों व भावनाओं के खिलाफ जाते हैं। न्या. बागची ने कहा कि लोकप्रियता की चाह में अस्पष्ट याचिकाएं दाखिल नहीं की जानी चाहिए, मामला ऐसा होना चाहिए जिसमें संवैधानिक आधार पर विचार हो सके, वास्तव में आज राजनीति इतनी असहिष्णु व प्रतिस्पर्धी हो गई है कि नेता उत्तेजक भाषण देने से बाज नहीं आते।

चुनाव के समय भड़काऊ बयान देना आम बात हो गई है। यद्यपि सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सम्मान कायम रखते हुए चुनाव लड़ने को कहा है, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। इसके लिए राजनीतिक पार्टियां खुद ही जिम्मेदार हैं।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com