
सुप्रीम कोर्ट और पूर्व में दोषी ठहराया गया सुरेंद्र कोली।
Supreme Court on Nithari Serial Murder Case: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार यानी 11 नवंबर को 2006 के निठारी सीरियल मर्डर केस में दोषी ठहराए गए सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी दोष सिद्धि रद्द कर दी है। कोर्ट ने आदेश दिया कि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उसे तुरंत रिहा कर दिया जाए। दरअसल, सुरेंद्र कोली की ओर से अपनी दोष सिद्धि के विरुद्ध सुधारात्मक याचिका दायर की गई थी। इसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
15 वर्षीय लड़की के हत्या मामले में फरवरी 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने कोली की दोष सिद्धि को बरकरार रखा था। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से उसके खिलाफ शेष 12 मामलों में बरी किए जाने के बाद, उसने इस वर्ष फिर से सुधारात्मक याचिका के साथ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने आज कोली को बरी कर दिया। अंतिम मामले में उसकी दोष सिद्धि को रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति नाथ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को आरोपों से बरी किया जाता है। याचिकाकर्ता को तत्काल ही रिहा किया जाए। कोली की सुधारात्मक याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 7 अक्टूबर को टिप्पणी की थी कि दोष सिद्धि केवल एक बयान और रसोई के चाकू की बरामदगी के आधार पर हुई थी। अदालत ने यह भी कहा था कि बाकी मामलों में बरी किए जाने से असामान्य स्थिति पैदा हो गई है।
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2005 और 2006 के बीच नोएडा में निठारी हत्याकांड हुआ था। यह मामला दिसंबर 2006 में तब सबके ध्यान में आया, जब नोएडा के निठारी गांव में एक घर के पास नाले में से काफी कंकाल मिले। यह पता चला कि मोनिंदर सिंह पंढेर उस घर का मालिक था और कोली उसका नौकर था। कोली पर इन हत्याओं, रेप, नरभक्षण और अन्य कृत्यों का आरोप था। 16 मामलों में कोली को मौत की सजा सुनाई गई थी। पंधेर दो मामलों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सभी मामलों में दोनों को बरी कर दिया। कोर्ट ने जांच एजेंसियों (यूपी पुलिस और सीबीआई) की लापरवाही पूर्ण जांच को कटघरे में खड़ा किया था।






