SC का सीएम हिमंता के खिलाफ हेट स्पीच मामले में FIR की मांग पर सुनवाई से इनकार, हाई कोर्ट जाने की दी सलाह

Supreme Court on Hate Speech Case: मुख्यमंत्री हिमंता बिस्‍वा सरमा के खिलाफ 'हेट स्‍पीच' मामले में FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप गुवाहाटी हाई कोर्ट क्यों नहीं गए?
SC refuses to hear plea for FIR against CM Himanta in hate speech case, advises him to approach High Court
सुप्रीम कोर्ट (इमेज-सोशल मीडिया)
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Supreme Court News: हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ कथित ‘हेट स्पीच’ मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि वे सीधे शीर्ष अदालत क्यों पहुंचे और पहले हाई कोर्ट का रुख क्यों नहीं किया। अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट की संवैधानिक शक्तियों को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री ने मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित आपत्तिजनक बयान दिए और मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि चुनाव से पहले ऐसे मामलों में सीधे सुप्रीम कोर्ट आने का एक नया चलन बनता जा रहा है, जबकि पहले संबंधित हाई कोर्ट जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई बहस?

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मुख्यमंत्री आदतन इस तरह के बयान देते रहे हैं और अब तक न तो एफआईआर दर्ज हुई है और न ही जांच शुरू हुई है। उन्होंने कुछ पूर्व मामलों का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई योग्य है।

मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि हर चुनावी राज्य में राजनीतिक विवादों को लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के पास भी पर्याप्त संवैधानिक अधिकार हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने इसे “फोरम शॉपिंग” की प्रवृत्ति करार देते हुए कहा कि पहले संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर की जानी चाहिए।

अदालत की सख्त टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट का मनोबल कमजोर नहीं होने दिया जाएगा और न ही उसकी अधिकारिता को कमतर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले ही कई मामलों में ट्रिब्यूनल बनाकर हाई कोर्ट को बायपास किया गया है, इसलिए सीधे सुप्रीम कोर्ट आना उचित परंपरा नहीं है। अदालत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवैधानिक मर्यादा का पालन करने की अपील की। फिलहाल, याचिकाकर्ताओं को पहले हाई कोर्ट जाने की सलाह दी गई है।

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