
सीएम रेखा गुप्ता और पूर्व सीएम केजरीवाल
नई दिल्ली : दिल्ली में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। परिवहन विभाग ने 2019 से जारी फिटनेस जांच की निशुल्क सुविधा को समाप्त कर दिया है। अब टैक्सी और ऑटो की फिटनेस जांच के लिए चालकों को शुल्क देना पड़ेगा।
नए नियमों के मुताबिक, टैक्सी की फिटनेस जांच के लिए 300 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। इस फैसले से दिल्ली के लगभग 50,000 टैक्सी मालिकों और 1 लाख से ज्यादा ऑटो चालकों पर सीधा असर पड़ने वाला है।
2019 में दिल्ली सरकार ने ऑटो, काली-पीली टैक्सी और इकॉनोमिक टैक्सियों की फिटनेस जांच पर लगने वाले शुल्क को खत्म कर दिया था। उस समय ऑटो के लिए 200 रुपये और टैक्सी के लिए 400 रुपये फीस ली जाती थी। यह फैसला 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले लिया गया था, जिसे आम आदमी पार्टी की पुनः सत्ता वापसी से भी जोड़ा गया था।
करीब साढ़े पांच वर्षों तक यह सुविधा जारी रही और ऑटो-टैक्सी चालक बिना कोई शुल्क दिए ऑनलाइन स्लॉट बुक कर फिटनेस जांच कराते रहे। लेकिन 1 अप्रैल 2025 से परिवहन विभाग ने यह सुविधा खत्म कर दी है, और अब चालकों को जांच के लिए शुल्क देना होगा।
ऑटो-टैक्सी यूनियन का आरोप है कि इस फैसले के लिए कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया। जब चालकों ने 1 अप्रैल से ऑनलाइन स्लॉट बुक किया, तभी उन्हें पता चला कि अब जांच के लिए फीस देनी होगी।
ऑल दिल्ली ऑटो-टैक्सी ट्रांसपोर्ट कांग्रेस यूनियन समेत कई संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया है। यूनियन अध्यक्ष किशन वर्मा ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने चालकों को सुविधाएं देने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले पर चर्चा के लिए उन्होंने परिवहन आयुक्त से मिलने का समय मांगा, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया। यूनियन जल्द ही परिवहन मंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखेंगी।
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केवल फिटनेस जांच शुल्क ही नहीं, बल्कि देरी से जांच कराने पर लगने वाले जुर्माने की राशि में भी वृद्धि कर दी गई है। पहले जहां यह 20 रुपये प्रतिदिन थी, अब इसे बढ़ाकर 50 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है।






