केजरीवाल पहुंचे सुप्रीम कोर्ट! हाईकोर्ट से झटके के बाद अब 'जज बदलने' की मांग, क्या शीर्ष अदालत से मिलेगी राहत?

Arvind Kejriwal: जस्टिस शर्मा की पीठ ने नौ मार्च को आबकारी नीति मामले में सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी थी।
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अरविंद केजरीवाल, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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AAP National Convenor Arvind Kejriwal: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शराब घोटाला मामले में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने मामले की सुनवाई कर रहीं जज स्वर्ण कांता शर्मा रो बदलने की मांग की थी। अरविंद केजरीवाल ने जज पर पक्षपात का आरोप लगाया था। हालांकि हाई कोर्ट से झटका मिलने के बाद केजरीवाल ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों ने शराब घोटाला मामले में उन्हें आरोपमुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर सीबीआई की याचिका जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की जगह किसी और जस्टिस के समक्ष सूचीबद्ध करने की अपील की गई थी।

मामले पर हाई कोर्ट की प्रतिक्रिया

घटनाक्रम से परिचित सूत्रों के अनुसार जस्टिस उपाध्याय ने कहा कि जस्टिस शर्मा रोस्टर के अनुसार, अधीनस्थ अदालत के फैसले के खिलाफ दायर सीबीआई की याचिका पर सुनवाई कर रही हैं और याचिका किसी और न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध करने का कोई कारण नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने साफ किया कि संबंधित न्यायाधीश ही किसी याचिका से खुद को अलग करने का फैसला ले सकता है।

याचिका पर सोमवार को होगी सुनवाई

सीबीआई की याचिका सोमवार को न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के समक्ष सूचीबद्ध है। केजरीवाल, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया और अन्य व्यक्तियों ने 11 मार्च को मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय के समक्ष एक प्रतिवेदन पेश करके सीबीआई की याचिका जस्टिस स्वर्णकांता की जगह किसी निष्पक्ष न्यायाधीश को सौंपने का अनुरोध किया था।

अरविंद केजरीवाल ने क्या कहा?

प्रतिवेदन में केजरीवाल ने दावा किया कि उन्हें इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने की गंभीर, वास्तविक और वाजिब आशंका है। बता दें, 27 फरवरी को निचली अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को आरोपमुक्त करते हुए सीबीआई को फटकार लगाई थी।

CBI अधिकारी के खिलाफ जांच पर रोक

जस्टिस शर्मा की पीठ ने नौ मार्च को आबकारी नीति मामले में सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी थी। न्यायमूर्ति शर्मा ने सीबीआई की याचिका पर सभी 23 आरोपियों से जवाब मांगा था। उन्होंने कहा था कि अभियोग तय करने की प्रक्रिया के दौरान कुछ निष्कर्ष और टिप्पणियां प्रारंभिक रूप से गलत प्रतीत होती हैं और उनपर विचार किए जाने की जरूरत है।

केजरीवाल का दावा

अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि उनकी आशंका न्यायाधीश के पूर्व आचरण पर आधारित है। उन्होंने कहा कि उन्हें आरोपमुक्त करने के फैसले के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका के पहले ही दिन, न्यायमूर्ति शर्मा ने दूसरे पक्ष की दलीलें सुने बिना ही प्रथम दृष्टया यह राय दर्ज कर दी कि निचली अदालत के विस्तृत आदेश में गलतियां हैं।

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