

BJP-IVP Merger MDC: राजधानी दिल्ली में इस समय भारतीय जनता पार्टी की ट्रिपल इंजन की सरकार चल रही है, केंद्र की कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में है तो दिल्ली को चलाने का जिम्मा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के पास है। इसके अलावा दिल्ली मुंसिपल कमिशन (एमसीडी) भी बीजेपी के पास ही है। दिल्ली में अगले साल एमसीडी के चुनाव होने वाले हैं और भाजपा ने इसकी तैयारी करना अभी से शुरू कर दी है। 14 महीने पहले आम आदमी पार्टी (आप) के 16 पार्षदों ने अलग हाेकर अपनी एक अलग पार्टी आइवीपी बना ली थी। 10 जुलाई को ये सभी पार्षद बीजेपी में शामिल हो गए। इस एक विलय से एमसीडी में बीजेपी की ताकत कई गुना बढ़ गई है। आइए आपको इसी बहाने दिल्ली एमसीडी चुनाव और इसकी राजनीति के बारे में बताते हैं। साथ ही ये भी कि बीजेपी ने यह फैसला क्यों लिया? इसके पीछे क्या राजनीतिक गणित है?
आइवीपी का पूरा नाम इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी है। इस गठन मई 2025 में आम आदमी पार्टी (AAP) के 16 बागी पार्षदों द्वारा किया गया था। इसका नेतृत्व मुकेश गोयल कर रहे हैं। गोयल आप में लंबे समय तक जुड़े थे। शुक्रवार को उन्होंने जब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की उपस्थिति में भाजपा की सदस्यता ली, तो उन्होंने आप छोड़ने और बीजेपी जॉइन करने को लेकर कहा कि हम सभी ने 2022 में आप के टिकट पर एमसीडी का चुनाव लड़ा था। लेकिन वो सिर्फ पार्षदों को बरगलाते रहे और विकास कार्यों के लिए एक भी रुपया पास नहीं किया।
मुकेश गोयल ने कहा कि आम आदमी पार्टी के इस रवैए से पार्षदों में गुस्सा था। जब रेखा गुप्ता ने दिल्ली की कमान संभाली तो उन्होंने हमारा सहयोग किया। इसके चलते कई पार्षद बीजेपी में शामिल हो गए थे, वहीं हमने अपनी एक अलग पार्टी बनाई थी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता दिल्ली की जनता के लिए बेहतर काम कर रही हैं, साथ ही वो हमारा पूरा सहयोग भी कर रही थीं। इसे देखते हुए हमने उनके साथ जाने का फैसला किया है।
इस मौके पर सीएम रेखा गुप्ता ने कहा एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दिल्ली की प्रगति और जनसेवा के संकल्प को आज नई मजबूती मिली है। इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के 16 पार्षदों ने भारतीय जनता पार्टी में अपना विलय किया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित दिल्ली के संकल्प को साकार करने के लिए हम सभी एक टीम के रूप में पूरी प्रतिबद्धता और ऊर्जा के साथ कार्य करेंगे।
उन्होंने कहा कि पार्षदों का यह निर्णय राजधानी के विकास कार्यों को नई गति प्रदान करेगा। भारतीय जनता पार्टी परिवार में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से दिल्लीवासियों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने तथा विकास की गति को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए हम पूर्णतः संकल्पबद्ध हैं।
| क्रमांक | नाम | क्षेत्र | वार्ड नंबर |
| 1 | मुकेश कुमार गोयल | आदर्श नगर | 15 |
| 2 | हेमचंद गोयल | मोलड़बंद | 181 |
| 3 | देवेंद्र कुमार | मयूर विहार फेज-2 | 196 |
| 4 | उषा शर्मा | सदर बाजार | 72 |
| 5 | दिनेश कुमार | बांकनेर | 2 |
| 6 | सुमन अनिल राणा | रोहिणी बी | 227 |
| 7 | मनीषा जसबीर कालरा | रानी खेड़ा | 33 |
| 8 | बॉबी | सुल्तानपुरी | 43 |
| 9 | रुणाक्षी शर्मा | बलजीत नगर | 88 |
| 10 | राजेश के. लाड़ी | हरिनगर | 99 |
| 11 | साहिब कुमार | विकासपुरी | 107 |
| 12 | राखी यादव | हस्तसाल | 108 |
| 13 | कमल भारद्वाज | हौज खास | 148 |
| 14 | लीना कुमार | मालवीय नगर | 149 |
| 15 | हिमानी जैन | वसंत विहार | 153 |
| 16 | अशोक पांडेय | विकास नगर | 109 |
आइवीपी के विलय के बीजेपी को बिना शक फायदा हुआ है। विलय के बाद एमसीडी में बीजेपी पार्षदों की संख्या 139 पहुंच गई है। जो इससे पहले केवल 123 ही थी। यानी अब बीजेपी के पास एमसीडी में भी बहुमत है और अब बीजेपी अपने मन मुताबिक चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन चुन सकते हैं। जिसके नामांकन का आज आखिरी दिन है। जानकारी के मुताबिक, आइवीपी से आने वाले कुछ पार्षदों को एमसीडी के वार्ड कमेटियों में मौका दिया जा सकता है? हालांकि, आइवीपी और बीजेपी को एक नाजुक समझौता माना जा रहा है।
दरअसल हाल ही में एमसीडी में नाली की सफाई को लेकर एक बैठक आयोजित की गई थी। इसमें आइवीपी को बोलने का मौका नहीं मिलने पर आइवीपी के पार्षद बुरी तरह नाराज हो गए थे और सदन से वाकआउट कर दिया था। लेकिन अब दोनों पार्टियों ने स्थायीय समिति के चुनाव के देखते हुए साथ आने का फैसला किया है। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता कि यह साथ कब तक चलेगा।
माना जा रहा है कि बीजेपी आइवीपी के पार्षदों को स्थायी समिति में मौका दे सकती है, साथ ही कुछ पार्षदों को एमसीडी के जोन अध्यक्ष औऱ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। इससे मुकेश गोयल का दबदबा और बढ़ जाएगा। जिसका फायदा बीजेपी अगले साल होने वाले चुनाव में उठाना चाहती है। माना जा रहा है कि बीजेपी गोयल को कोई बड़ा पद दे सकती है।
दिल्ली के सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि मुकेश गोयल को एमसीडी की तदर्थ या विशेष समिति में अध्यक्ष का पद दिया जा सकता है। वहां आइवीपी के सह प्रमुख हेमचंद्र गोयल को एमसीडी के सेंट्रल जोन से स्थायी समिति में सदस्य बना कर भेज सकती है।
बीजेपी और आइवीसी की विलय रेखा सरकार की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। दिल्ली में अगले साल नगर निगम चुनाव होने हैं। बीजेपी इससे पहले अपनी सारी कमजोरियों को दूर कर लेना चाहती है। इसमें से एक संख्या बल भी है। आइवीसी के विलय से बीजेपी के एमसीडी में अब कुल 139 पार्षद हो गए हैं। जो बहुमत के 125 के आंकड़े से 14 अधिक हैं। ऐसे में बीजेपी खुद को पहले से मजबूत स्थिती में देख रही है। वहीं, आइवीपी को अपने भविष्य को लेकर चिंताएं थी। मुकेश गोयल और उनके पार्षदों को पता था कि आइवीपी के चुनाव निन्ह पर उनका वापस जीतना मुश्किल था। ऐसे में पार्टी ने बीजेपी जैसी मजबूत पार्टी का दामन थामा है।