

Magneto Mall Raipur News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बुधवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब लाठी-डंडों से लैस करीब 80-90 लोगों की भीड़ ने मैग्नेटो मॉल में घुसकर उत्पात मचाया। क्रिसमस की सजावट को तहस-नहस करने वाली इस भीड़ ने मॉल में मौजूद सुरक्षा कर्मियों और आम लोगों के बीच भारी दहशत पैदा कर दी।
बुधवार, 25 दिसंबर 2025 को रायपुर का मैग्नेटो मॉल उस समय अखाड़ा बन गया जब छत्तीसगढ़ बंद के समर्थकों ने वहां धावा बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लाठी-डंडों से लैस भीड़ ने मॉल के सुरक्षा गार्डों की रोक और चेतावनियों को पूरी तरह अनसुना कर दिया और जबरन भीतर प्रवेश कर लिया। मॉल के भीतर लगी लाइट्स, क्रिसमस ट्री और अन्य सजावटी सामानों को बेरहमी से तोड़ दिया गया। मॉल के एक कर्मचारी ने बताया कि भीड़ बार-बार चिल्ला रही थी कि वे सांता क्लॉस को नहीं देखना चाहते।
मॉल के कर्मचारियों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उन्होंने पिछले 16 वर्षों में कई बार बंद का समर्थन किया है, लेकिन ऐसी हिंसा और धमकी भरा व्यवहार कभी नहीं देखा। तोड़फोड़ के दौरान मॉल में मौजूद कई महिलाएं डर के मारे रोने लगीं और जो भी भीड़ को रोकने की कोशिश करता, उस पर हमला कर दिया जाता। फिल्म देखने आए दर्शक और मॉल में मौजूद लोग जान बचाकर भागने लगे, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
इस राज्यव्यापी बंद का आह्वान 'सर्व हिंदू समाज' द्वारा कथित धार्मिक रूपांतरण के विरोध में किया गया था। इस तनाव की मुख्य वजह कांकेर जिले के बड़ेतेवड़ा गांव में 16 दिसंबर को हुई एक घटना थी, जहां गांव के सरपंच राजमन सलाम ने अपने पिता के शव को ईसाई रीति-रिवाजों के साथ अपनी निजी जमीन पर दफनाया था। इस घटना से नाराज भीड़ ने वहां के प्रेयर हॉल में तोड़फोड़ की थी और बाद में 18 दिसंबर को हुई झड़प में 20 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। अंततः कानूनी प्रक्रिया के बाद शव को निकालकर कब्रिस्तान में दफनाया गया, जिसने पूरे राज्य में तनाव बढ़ा दिया।
रायपुर और अन्य शहरी इलाकों में इस बंद को व्यापक समर्थन मिला, जहां अधिकांश व्यावसायिक प्रतिष्ठान और दुकानें बंद रहीं। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में इस बंद का असर अपेक्षाकृत कम देखा गया। रायपुर में मैग्नेटो मॉल जैसी तोड़फोड़ की छिटपुट घटनाओं को छोड़कर, राज्य के ज्यादातर हिस्सों में स्थिति सामान्य बनी रही।