CEC Gyanesh Kumar: कौन हैं ज्ञानेश कुमार, जो 19 को मुख्य चुनाव आयुक्त का संभालेंगे कार्यभार; कुछ इस तरह से हुई करियर की शुरुआत

Who is Gyanesh Kumar: ज्ञानेश, आईआईटी कानपुर से बीटेक की डिग्री लेने के बाद वे सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने दिल्ली पहुंचे। सिविल सर्विसेज के तैयारी के दौरान वहां एक साल उन्होंने हुडको में भी काम किया।
Gyanesh Kumar: कौन हैं ज्ञानेश कुमार, जो 19 को मुख्य चुनाव आयुक्त का संभालेंगे कार्यभार; कुछ इस तरह से हुई करियर की शुरुआत
ज्ञानेश कुमार, फोटो - सोशल मीडिया
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Know All about Gyanesh Kumar : चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत का नया मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है। 19 फरवरी, 2025 से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यभार संभालेंगे।

बता दें, यह नियुक्ति मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 4 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है। ऐसे में आज के इस आर्टिकल में जानेंगे कि कौन हैं ज्ञानेश कुमार, जो 19 फरवरी से राजीव कुमार का स्थान ले रहे हैं।

ज्ञानेश के परिवार में ज्यादातर लोग हैं डॉक्टर्स

आगरा में जन्मे ज्ञानेश कुमार गुप्ता के पिता डॉ. सुबोध कुमार गुप्ता और मां सत्यवती गुप्ता विजय नगर कॉलोनी में रहते हैं। नए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार गुप्ता के पिता मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद से रिटायर हो चुके हैं। पिता के सरकारी नौकरी में होने की वजह से तबादला होता रहा, जिसके कारण ज्ञानेश कुमार की शिक्षा गोरखपुर, लखनऊ और कानपुर से हुई। बता दें, ज्ञानेश के परिवार में ज्यादातर चिकित्सक हैं पर उन्होंने इससे अलग रास्ता चुना।

भारत के 26वें चुनाव आयुक्त बने ज्ञानेश कुमार

नए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का परिवार मूल रूप से मिढ़ाकुर का रहने वाला है लेकिन पिता वहां से आगरा आकर बस गए। ज्ञानेश बचपन से ही प्रतिभाशाली थे। वाराणसी के क्वींस कॉलेज में वह टॉपर रहे। 12वीं उन्होंने लखनऊ के काल्विन तालुकेदार कॉलेज से की और यहां भी उन्होंने टॉप किया। इसके बाद आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री ली।

आईआईटी कानपुर से बीटेक के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी

ज्ञानेश, आईआईटी कानपुर से बीटेक की डिग्री लेने के बाद वे सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने दिल्ली पहुंचे। सिविल सर्विसेज के तैयारी के दौरान वहां एक साल उन्होंने हुडको में भी काम किया। 1988 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और केरल कैडर के आईएसएस अधिकारी बन गए। पहली नियुक्ति उन्हें तिरुवनंतपुरम में बतौर डीएम मिली। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन भी कर रखा है। देश की अन्य खबरों को पढ़ने के लिए इस लिंक पर टैप करें... 

रक्षा मंत्रालय में संयुक्त रक्षा सचिव रहे ज्ञानेश

यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2007 से 2012 तक वे रक्षा मंत्रालय में संयुक्त रक्षा सचिव रहे। 2014 में वे केरल सरकार के दिल्ली में रेजिडेंट कमिशनर थे। इस्लामिक स्टेट की हिंसक गतिविधियों के बीच उन्होंने 183 भारतीयों को इराक से निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें इरबिल में फंसी 46 मलयाली नर्स भी शामिल थीं। ज्ञानेश पिछले साल जनवरी में सहकारिता मंत्रालय में सचिव के रूप में कार्य करते हुए रिटायर हुए थे।

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